Bharat Express DD Free Dish

‘साहस के बिना ‘यश’ संभव नहीं…’, पीएम मोदी ने शेयर किया शौर्य और संकल्प का वह मंत्र, जिसने लंदन में हिला दी थी अंग्रेजों की नींव!

नरेंद्र मोदी ने श्यामजी कृष्ण वर्मा की पुण्यतिथि पर संस्कृत सुभाषित साझा कर साहस और राष्ट्रसेवा का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि बिना साहस के कोई भी उज्ज्वल यश हासिल नहीं किया जा सकता…

PM Modi today Sanskrit Subhashit: 30 मार्च 2026 को क्रांतिकारी नायक श्यामजी कृष्ण वर्मा की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा संस्कृत श्लोक साझा किया है, जो आज के ‘विकसित भारत’ के संकल्पों को नई ऊर्जा दे रहा है. प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर सुभाषित साझा करते हुए लिखा कि ‘विचित्रचरितोल्लेखचमत्कारितचेतनम्. प्राप्यते किं यशः शुभ्रमनङ्गीकृत्य साहसम्॥’

इस श्लोक का भावार्थ अत्यंत गहरा है कि ‘विलक्षण कार्यों के वर्णन से मन को चमत्कृत करने वाला उज्ज्वल यश केवल साहस को धारण करने से ही प्राप्त किया जाता है.’ पीएम मोदी का यह संदेश केवल एक श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि उस ‘साहस’ की पहचान है जिसने श्यामजी कृष्ण वर्मा को सात समंदर पार लंदन में ‘इंडिया हाउस’ जैसा क्रांतिकारी केंद्र स्थापित करने की शक्ति दी थी.

 

सुभाषित का मर्म: क्यों जरूरी है साहस?

प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस सुभाषित में ‘शुभ्र यश’ यानी निष्कलंक ख्याति की बात कही गई है. श्यामजी कृष्ण वर्मा का जीवन इसी श्लोक का जीवंत उदाहरण था. उन्होंने उस दौर में साहस दिखाया जब ब्रिटिश साम्राज्य का सूरज कभी अस्त नहीं होता था.

उन्होंने लंदन में रहकर न केवल क्रांतिकारियों को पनाह दी बल्कि ‘द इंडियन सोशियोलॉजिस्ट’ के जरिए वैचारिक क्रांति का सूत्रपात किया. पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि श्यामजी कृष्ण वर्मा का जीवन और उनके आदर्श देश की हर पीढ़ी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे, क्योंकि बिना जोखिम उठाए और बिना साहस दिखाए इतिहास में नाम दर्ज नहीं कराया जा सकता.

ये भी पढ़ें: ‘ईश्वर नहीं सुनेगा तुम्हारी प्रार्थना…’, क्या ट्रंप और नेतन्याहू से सख्त नाराज हैं पोप लियो?

पीएम मोदी और श्यामजी कृष्ण वर्मा का ‘अस्थि’ संबंध

प्रधानमंत्री मोदी का श्यामजी कृष्ण वर्मा से एक गहरा और भावनात्मक जुड़ाव रहा है. साल 2003 में जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वे खुद स्विट्जरलैंड के जिनेवा से श्यामजी कृष्ण वर्मा और उनकी पत्नी भानुमती की अस्थियों को भारत वापस लेकर आए थे. यह किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री द्वारा अपने क्रांतिकारी नायकों के प्रति दिखाया गया दुर्लभ सम्मान था.

आज अपनी पोस्ट में ‘हौसले की अद्भुत प्रेरणा’ का जिक्र कर पीएम मोदी ने उसी सम्मान को एक बार फिर दोहराया है. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने भी उनके इसी अदम्य साहस को याद किया, जो आज के युवाओं के लिए राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों के निर्वहन का मार्ग प्रशस्त करता है.

Also Follow Bharat Express on Youtube

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read