प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महर्षि वाल्मीकि जयंती के मौके पर देशवासियों को बधाई दी और उनके विचारों को भारतीय संस्कृति की अनमोल विरासत बताया. पीएम मोदी का कहना है कि महर्षि वाल्मीकि की शिक्षाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी सदियों पहले थीं. उनके संदेश समाज को बेहतर बनाने, लोगों को साथ लेकर चलने और मानवता के रास्ते पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए महर्षि वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने लिखा कि महर्षि वाल्मीकि के विचार भारतीय संस्कृति और विरासत की बुनियाद का अहम हिस्सा हैं. उनकी शिक्षाएं आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरित करती रहेंगी. पीएम ने यह भी कहा कि मानवता के लिए महर्षि वाल्मीकि के अनमोल संदेश हमेशा लोगों का मार्गदर्शन करते रहेंगे.
इस मौके पर प्रधानमंत्री ने संस्कृत का एक सुभाषित भी साझा किया. यह श्लोक महाकवि कालिदास के प्रसिद्ध महाकाव्य ‘रघुवंशम्’ के 14वें सर्ग से लिया गया है. इसमें महर्षि वाल्मीकि के जीवन से जुड़ी उस घटना का जिक्र है, जिसने उनके भीतर की करुणा को कविता का रूप दिया.
मान्यता के अनुसार, एक दिन महर्षि वाल्मीकि कुश और यज्ञ के लिए समिधाएं लेने गए थे. इसी दौरान उन्होंने एक क्रौंच पक्षी के जोड़े को देखा, जिसमें से एक पक्षी को शिकारी ने मार दिया. अपने साथी को खोने के बाद दूसरे पक्षी का करुण विलाप सुनकर महर्षि का हृदय द्रवित हो उठा. उनके मन में उठे दुख और करुणा के भाव शब्दों में ढल गए और एक श्लोक के रूप में सामने आए. इस प्रसंग को संस्कृत काव्य परंपरा में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. इसे रामायण की रचना से जुड़ी प्रमुख घटनाओं में भी गिना जाता है.
‘मन की बात’ में भी किया था महर्षि वाल्मीकि को याद
महर्षि वाल्मीकि जयंती से एक दिन पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में भी उन्हें याद किया था. उन्होंने कहा कि हजारों साल बीत जाने के बाद भी वाल्मीकि रामायण लोगों को जीवन की नई सीख देती है.
पीएम मोदी के मुताबिक, महर्षि वाल्मीकि ने अपनी रचना के जरिए लगातार प्रयास करते रहने, दूसरों की सेवा करने, करुणा दिखाने और समाज में आपसी मेलजोल बनाए रखने का संदेश दिया. ये ऐसी बातें हैं, जिनकी जरूरत आज भी उतनी ही है. बदलते समय में भी इन मूल्यों की अहमियत कम नहीं हुई है.
प्रधानमंत्री ने भगवान राम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि रामायण में ऐसे कई प्रसंग हैं, जो समानता और सबको साथ लेकर चलने की भावना को मजबूत करते हैं. भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को सम्मान दिया, वहीं निषादराज के साथ अपनी मित्रता को भी पूरी अहमियत दी. पीएम ने कहा कि इन घटनाओं से यह सीख मिलती है कि समाज में हर व्यक्ति के प्रति सम्मान और अपनापन होना चाहिए.
अयोध्या के राम मंदिर और एयरपोर्ट का भी किया जिक्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या के राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां भी महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी को सम्मान दिया गया है. राम मंदिर परिसर में इनसे जुड़े मंदिरों का निर्माण इसी परंपरा और विचारधारा को सामने लाता है.
उन्होंने अयोध्या के एयरपोर्ट का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखे जाने का भी जिक्र किया. पीएम के अनुसार, ऐसे प्रयास देश की सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने के साथ-साथ समाज में सेवा, करुणा और समानता जैसे मूल्यों को मजबूत करते हैं.
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