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पीएम-सेतु योजना से देश के 1,000 सरकारी आईटीआई होंगे आधुनिक, युवाओं को मिलेगा बेहतर प्रशिक्षण और रोजगार

पीएम-सेतु योजना के तहत देशभर में 1,000 सरकारी आईटीआई को आधुनिक बनाया जाएगा. इस योजना का उद्देश्य युवाओं को उद्योग-अनुकूल कौशल प्रशिक्षण देकर उनकी रोजगार क्षमता बढ़ाना और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करना है.

PM-SETU scheme
Edited by Sahil Singh

पीएम-सेतु (प्रधानमंत्री स्किलिंग एंड एम्प्लॉयबिलिटी ट्रांसफॉर्मेशन थ्रू अपग्रेडेड आईटीआई) योजना के तहत देशभर में 1,000 सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों यानी आईटीआई को आधुनिक बनाया जाएगा. यह घोषणा शनिवार को कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय द्वारा की गई.

मंत्रालय के अनुसार, इस पहल के तहत हब-एंड-स्पोक अप्रोच अपनाया जाएगा, जिसके तहत 200 आईटीआई को हब बनाया जाएगा, जहां उन्नत मशीनें, आधुनिक इमारतें और नई तकनीक से प्रशिक्षण दिया जाएगा. वहीं, 800 आईटीआई को स्पोक के रूप में जोड़ा जाएगा, ताकि जिलों तक प्रशिक्षण की सुविधा पहुंच सके.

कौशल विकास और उद्यमशीलता मंत्रालय (एमएसडीई) महाराष्ट्र सरकार के साथ मिलकर इस योजना को आगे बढ़ा रहा है. योजना की शुरुआत के तहत पुणे में एक बड़ा उद्योग परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा. इस पहल का उद्देश्य उद्योगों को योजना से जोड़ना और उन्हें इसके कार्यान्वयन में भागीदार बनाना है, ताकि प्रशिक्षण उद्योगों की जरूरतों के अनुसार दिया जा सके.

मंत्रालय के अनुसार, इस परामर्श कार्यक्रम में 50 से ज्यादा योग्य कंपनियां हिस्सा लेंगी. ये कंपनियां निर्माण, कपड़ा, ऑटोमोबाइल, उपभोक्ता सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, तेल और गैस तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों से जुड़ी होंगी.

पीएम-सेतु योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 4 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में किया गया था, जिसका मकसद देशभर के सरकारी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) को आधुनिक बनाकर उद्योग-अनुकूल बनाना है, ताकि युवाओं को विश्वस्तरीय कौशल प्रशिक्षण मिले, उनकी रोजगार क्षमता बढ़े और वे आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान दे सकें.

इस योजना के तहत आईटीआई सरकार के स्वामित्व में रहेंगे, लेकिन उनका संचालन उद्योगों की भागीदारी से किया जाएगा. इससे युवाओं को मांग के अनुसार प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और नौकरी पाने में मदद मिलेगी. अधिकारियों के अनुसार, यह परामर्श कार्यक्रम उद्योगों को केवल कभी-कभार जुड़ने की बजाय लंबे समय तक कौशल विकास व्यवस्था का हिस्सा बनने का मौका देगा. साथ ही, उद्योग प्रशिक्षण से जुड़े फैसलों और संचालन में भी भूमिका निभा सकेंगे. इस दौरान कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी किया जाएगा, जिससे उद्योगों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच साझेदारी मजबूत हो सके.


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इन समझौतों में महाराष्ट्र सरकार के व्यावसायिक शिक्षा और प्रशिक्षण निदेशालय (डीवीईटी) का फिएट इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया और अनुदीप फाउंडेशन के साथ समझौता शामिल होगा. इसके अलावा डीवीईटी और एसडीएन/वाधवानी के बीच भी साझेदारी की जाएगी.

इस क्लस्टर मॉडल से उद्योग सीधे संस्थानों के संचालन में योगदान दे सकेंगे, जिससे प्रशिक्षण को लेबर मार्केट की जरूरतों के अनुसार बनाया जा सकेगा, पाठ्यक्रम में सुधार होगा, शिक्षकों को नई तकनीक का प्रशिक्षण मिलेगा और अप्रेंटिसशिप व नौकरी के अवसर मजबूत होंगे.

-भारत एक्सप्रेस



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