प्रतिकात्मक फोटो
Jharkhand News: देश में विकास और सियासत एक साथ चलती रहती है. ऐसा होना करीब-करीब असंभव है कि अगर कोई विकास कार्य का शिलान्यास और लोकार्पण हो और उसपर सवाल न उठाएं जाएं. कुछ ऐसा ही झारखंड की राजधानी रांची में केंद्र सरकार की ओर से हुए विकास पर सियासत गरमाई हुई है. गुरुवार को राष्ट्रीय राजमार्ग मंत्रालय ने झारखंड को दो बड़े तोहफे दिए. इसके सात ही कई बड़े तोहफों की घोषणा खुद विभागीय मंत्री नितिन गडकरी ने की है. दो तोहफा में पहला गढ़वा बायपास रोड और दूसरा रांची में रातू रोड एलिवेटेड पुल है. हालांकि, अब सत्ता पक्ष के लोग इन दोनों कार्यों को लेकर सवाल उठा रहे हैं.
झामुमो ने उठाए सवाल
एक तरफ विकास कार्य हो रहे हैं वहीं दूसरी ओर झामुमो के महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने इसपर सवाल उठाए हैं. जेएमएम के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के झारखंड दौरे के दौरान कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया. हालांकि, जेएमएम ने सवाल उठाया कि जिस बाईपास का उद्घाटन किया गया, उसका टोल पहले से ही वसूला जा रहा था.
टोल वसूली पर सवाल: सुप्रियो भट्टाचार्य ने पूछा कि जब टोल टैक्स पहले से वसूला जा रहा था, तो फिर उद्घाटन कैसे हो गया? उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है कि उद्घाटन से पहले टोल वसूली क्यों की जा रही थी.
रातू एलिवेटेड कॉरिडोर पर सवाल: भट्टाचार्य ने रातू एलिवेटेड कॉरिडोर की लागत पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि रक्षा राज्य मंत्री ने इसकी लागत 400 करोड़ बताई, जबकि विभाग का कहना है कि लागत 558 करोड़ है. उन्होंने पूछा कि इसमें 158 करोड़ की वृद्धि कैसे हो गई और यह कैसा मजाक है?
बीचेपी ने सरकार को घेरा
उधर बीजेपी सत्ता पक्ष के इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है. भाजपा ने सत्ता पक्ष के ज्ञान और जानकारी पर भी सवाल उठाती है .बीजेपी कह रही है की सड़कों का इस्तेमाल अवैध बालू की ढुलाई करने वाले लोगों को समझ में नहीं आएगा की राष्ट्रीय राजमार्ग या केंद्र सरकार की योजनाओं की बजट की व्यवस्था कैसी होती है? झारखंड बीजेपी (Jharkhand BJP) प्रवक्ता अजय शाह ने कहा कि जानकारी हासिल करनी पड़ती है. बीजेपी तो सत्ता पक्ष पर ही घोटाले के आरोप लगाती है और घोटालों की लिस्ट भी बताती है.
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सत्ता पक्ष की समस्या यह है कि रातू रोड एलिवेटेड पुल का तामझाम के साथ उद्घाटन किया गया. इसमें बड़ी संख्या में शहर के लोग शामिल हुए. लोगों में केंद्र के इन तोहफों को लेकर उत्साह देखा गया क्यों कि इससे उनके जीवन में थोड़ी समस्याएं कम होंगी. हालांकि, इस कार्यक्रम में झारखंड मुक्ति मोर्चा (Jharkhand Mukti Morcha) के नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री किसी कारण से शामिल नहीं हो पाए. अब सियासी जानकार करते हैं कि उनकी पार्टी की विकास से समस्या इस लिए हो रही है कि मंच पर उनके नेता नहीं आ पाए. ऐसे में झारखंड के विकास का पूरा क्रिटिड भाजपा को मिल गया.
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