76th Republic Day: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 76वें गणतंत्र दिवस समारोह की अध्यक्षता की और राष्ट्रीय ध्वज फहराकर ऐतिहासिक दिन को मनाने में राष्ट्र का नेतृत्व किया. इस वर्ष के समारोह के मुख्य अतिथि इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो भी उनके साथ थे.
परेड में 300 कलाकारों का जलवा
परेड से पहले राष्ट्रगान के बीच राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया, जिसके बाद स्वदेशी 105-एमएम लाइट फील्ड गन का उपयोग करके 21 तोपों की सलामी दी गई. इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में संविधान के लागू होने के 75 वर्ष पूरे होने पर ध्यान केंद्रित किया गया और “जन भागीदारी” पर जोर दिया गया. परेड की शुरुआत 300 सांस्कृतिक कलाकारों द्वारा शहनाई, नादस्वरम, मशक बीन, बांसुरी, शंख, तुतारी और ढोल जैसे देश भर के पारंपरिक संगीत वाद्ययंत्रों का मिश्रण बजाते हुए “सारे जहां से अच्छा” बजाने से हुई.

साथ ही 129 हेलीकॉप्टर यूनिट के एमआई-17 1वी हेलीकॉप्टर कार्यक्रम के समापन पर ध्वज फॉर्मेशन में फूलों की पंखुड़ियों की एक लुभावनी वर्षा की. राष्ट्रीय ध्वज के प्रतीक इस स्वरूप का नेतृत्व ग्रुप कैप्टन आलोक अहलावत किया.
परमवीर चक्र विजेता ने दी सलामी
दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल भवनीश कुमार की कमान में परेड की शुरुआत राष्ट्रपति द्वारा सलामी लेने के साथ हुई. मेजर जनरल सुमित मेहता परेड के सेकेंड-इन-कमांड के रूप में काम किया. वीरता पुरस्कार विजेता परेड का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें परमवीर चक्र विजेता सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव (सेवानिवृत्त) और सूबेदार मेजर संजय कुमार (सेवानिवृत्त) और अशोक चक्र विजेता लेफ्टिनेंट कर्नल जस राम सिंह (सेवानिवृत्त) शामिल हैं. परमवीर चक्र दुश्मन के सामने सर्वोच्च बहादुरी के कार्यों का सम्मान करता है, जबकि अशोक चक्र सीधे युद्ध से जुड़े बिना समान वीरता को मान्यता देता है.
T-90 टैंक
परेड में थर्ड जेनेरेशन मेन बैटल टैंक टी-90 का प्रदर्शन किया गया.

BSF का ऊंट दस्ता
देश भर की सीमाओं को रखवाली करने वाला बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के ऊंट दस्ता परेड में शामिल हुआ.

76वें गणतंत्र दिवस का परेड समारोह खत्म हो चुका है. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कर्तव्य पथ पर तिरंगा फहराने के बाद हर साल की तरह इस बार भी शानदार परेड और झाकिंयों का प्रदर्शन किया गया. उत्तर प्रदेश से लेकर आंध्र प्रदेश तक देश के अलग-अलग राज्यों ने अलग-अलग थीमों पर झाकियों का प्रदर्शन किया. इस बार कुल 15 राज्यों और 16 मंत्रालयों की झाकियों काे परेड में जगह दी गई
सबसे पहली झांकी
कर्तव्य पथ पर सबसे पहली झांकी सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की रही. झांकी में संविधान की प्रस्तावना को प्रदर्शित किया गया.

पंजाब की झांकी में सुफी की झलक
पंजाब की ओर से आई झांकी में बाबा सूफी शेख फरीद का चित्रण किया गया. साथ ही गुरू ग्रंथ साहिब को भी दिखाया गया.

उत्तर प्रदेश की झांकी में कुंभ दर्शन
इस बार उत्तर प्रदेश की झांकी का थीम महाकुंभ रहा, जो 13 जनवरी से 26 फरवरी तक राज्य में चलने वाले महाआयोजन को दर्शा रहा था.

सालों बाद बिहार की झांकी
76वें गणतंत्र दिवस परेड में लगभग 8 सालों बाद बिहार की झांकी दिखी. झांकी में नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहरों के चारों ओर बौद्ध भिक्षुओं को बैठे हुए दिखाया गया है. झांकी के अगले हिस्से में भगवान बुद्ध की ध्यानमग्न ‘धर्मचक्र मुद्रा’ में बैठी प्रतिमा थी, जो शांति और सद्भाव का प्रतीक है.

-भारत एक्सप्रेस
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