झारखंड के धनबाद में 9 दिसंबर का दिन दिव्यांग बच्चों के लिए बेहद खास रहा, जब अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ‘पहला कदम स्कूल’ और नारायणी चैरिटेबल ट्रस्ट पहुंचे. दोनों संस्थाएं गरीब दिव्यांग बच्चों को मुफ्त शिक्षा, थेरेपी और जीवन कौशल का प्रशिक्षण देती हैं. बच्चों से मिलकर अदाणी भावुक हो गए और उनके सपनों व संघर्षों को करीब से समझा. इसी मुलाकात पर अदाणी फाउंडेशन की चेयरपर्सन प्रीति अदाणी ने भी एक भावुक पोस्ट साझा की. उन्होंने लिखा-
‘गौतम को इन असाधारण बच्चों के साथ बैठते, उनकी बातें सुनते, हौसला बढ़ाते, राष्ट्रीय गान गाते, देखना बेहद प्रेरक था. यह हमें याद दिलाता है कि सेवा ही हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. इन बच्चों का साहस हमें विनम्र करता है और इनकी मुस्कान हमें और आगे बढ़ने की ताकत देती है.’
‘नई उड़ान कैफे’ का उद्घाटन
गौतम अदाणी ने धनबाद में ‘नई उड़ान कैफे’ का उद्घाटन किया है जिसे दिव्यांग बच्चे ही संचालित करेंगे. यहां बच्चे खाना बनाना, सर्व करना, ऑर्डर संभालना और कैफे चलाना सीखेंगे. यह कदम उन्हें आत्मनिर्भरता, रोजगार और छोटे बिजनेस की दिशा में आगे बढ़ाने का बड़ा प्रयास माना जा रहा है.
Watching Gautam sit with these extraordinary children – listening, encouraging, singing the National Anthem, simply being present – was profoundly moving. It reminded me why service is our greatest responsibility.
Their courage humbles us, and their smiles strengthen our… pic.twitter.com/B19c6M3aIA
— Priti Adani (@AdaniPriti) December 12, 2025
अदाणी समूह 3 साल तक देगा सहयोग
गौतम अदाणी ने बच्चों, शिक्षकों और ट्रस्ट के सदस्यों से लंबी चर्चा की थी. इसके बाद उन्होंने कहा कि हर बच्चे को उसकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए. उन्होंने स्कूल को अगले तीन साल तक हर तरह की मदद देने की प्रतिबद्धता जताई. मुलाकात के दौरान कई बच्चे अपने सपने और अनुभव बताते हुए भावुक हो गए.
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पैरा-स्पोर्ट्स में चमका नाम
‘पहला कदम स्कूल’ के बच्चे राष्ट्रीय पैरा-स्पोर्ट्स में झारखंड का नाम रोशन कर चुके हैं. स्कूल को राष्ट्रपति और राज्यपाल द्वारा सम्मान मिल चुका है. यहां फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी और जीवन कौशल की ट्रेनिंग बिल्कुल मुफ्त दी जाती है. गौतम और प्रीति अदाणी द्वारा दिया गया यह मानवीय संदेश पूरे समाज के लिए प्रेरणा है. दिव्यांग बच्चों का हाथ थामकर उन्हें सम्मान, अवसर और आत्मनिर्भरता की राह देना केवल सहयोग नहीं, बल्कि समावेशी भारत की ओर मजबूत कदम है.
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