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प्रोफेसर मीता नारायण को मिला ‘Dostoevsky Star Award’, रूसी भाषा और इंडो-रशियन संबंधों में असाधारण योगदान के लिए किया सम्मानित

जेएनयू की वरिष्ठ प्रोफ़ेसर मीता नारायण को रूस-भारत सांस्कृतिक और शैक्षणिक रिश्तों को मजबूत बनाने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘दोस्तोयेव्स्की स्टार अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान रूसी साहित्य और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देने वाली प्रमुख हस्तियों को दिया जाता है.

Dostoevsky Star Award: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में उस वक्त तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी, जब सेंटर ऑफ रशियन स्टडीज की वरिष्ठ प्रोफेसर मीता नारायण को प्रतिष्ठित ‘दोस्तोयेव्स्की स्टार अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया. यह सम्मान उन हस्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने रूसी भाषा, साहित्य और भारत–रूस सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

रूसी हाउस द्वारा दिया जाने वाला यह अवॉर्ड दुनिया भर के उन विद्वानों और सांस्कृतिक हस्तियों को पहचान देता है, जिन्होंने दोस्तोयेव्स्की की विरासत और इंडो-रशियन संवाद को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान दिया हो. इससे पहले भी कई भारतीय इस सम्मान से नवाजे जा चुके हैं. मशहूर गीतकार और कवि जावेद अख्तर भी इसके प्रमुख भारतीय प्राप्तकर्ताओं में शामिल हैं.

रूसी भाषा और साहित्य की भारत में नई धारा तैयार की

प्रोफेसर मीता नारायण का नाम रूस-भारत सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों में एक भरोसेमंद सेतु की तरह देखा जाता है. रूसी भाषा, फिलोलॉजी और अनुवाद अध्ययन में उनकी विशेषज्ञता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाती है. सोवियत संघ के विघटन के बाद उन्होंने रूसी अध्ययन के पाठ्यक्रमों को आधुनिक रूप देने में अहम भूमिका निभाई. आज भारत और विदेशों के कई विश्वविद्यालय उन्हीं द्वारा पुनर्लेखित पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करते हैं.

इतना ही नहीं, रूसी सरकार की ओर से मिलने वाला पुष्किन मेडल भी उन्हें पहले ही मिल चुका है, जो उनकी उपलब्धियों को और मजबूत करता है. प्रोफ़ेसर नारायण को कोलंबिया यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी जैसे विश्वस्तरीय संस्थानों में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर भी आमंत्रित किया जाता है.

Dostoevsky Star Award

दोस्तोयेव्स्की की विरासत और नई पीढ़ी से संवाद

नवीनतम समारोह की सबसे खास बात यह रही कि दोस्तोयेव्स्की स्टार अवॉर्ड रूस के महान साहित्यकार फ़्योदोर दोस्तोयेव्स्की के पर-परपोते द्वारा स्वयं प्रदान किया गया. JNU में आयोजित यह कार्यक्रम न सिर्फ एक सम्मान समारोह था, बल्कि भारत में रूसी संस्कृति और साहित्यिक शोध की बढ़ती महत्ता को भी उजागर करता है.

इस अवसर पर प्रोफेसर मीता नारायण की उपलब्धियों का जश्न मनाया गया उनके काम ने न सिर्फ रूसी भाषा को समझने का भारतीय दृष्टिकोण बदला, बल्कि दोनों देशों के बीच बौद्धिक और सांस्कृतिक संबंधों को भी नई दिशा दी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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