Ketan Murder Case: पुणे में हुए चर्चित मर्डर केस में नया मोड़ सामने आया है. पुलिस पूछताछ में सिया गोयल ने कबूल किया कि वह केतन अग्रवाल से शादी नहीं करना चाहती थी. उसका मानना था कि अगर केतन की मौत हो जाती है तो उसे शादी के दबाव से बचने के लिए कम से कम तीन साल का समय मिल जाएगा. जांचकर्ताओं का कहना है कि चेतन चौधरी ने भी सिया से शादी करने से पहले कुछ साल का वक्त मांगा था.
अरेंज मैरिज और बदनामी का डर
पुलिस के मुताबिक, अरेंज मैरिज टूटने पर समाज में बदनामी का डर सिया और चेतन के मन में था. इसी वजह से दोनों ने मिलकर केतन को रास्ते से हटाने की योजना बनाई. यह भी सामने आया है कि फरवरी में सगाई से पहले दोनों उदयपुर घूमने गए थे. जनवरी में वे राजस्थान में करीब पांच दिन रुके थे. चेतन वहीं का रहने वाला है.
उदयपुर ट्रिप पर शक
जांच टीम अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उस ट्रिप के दौरान दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी? क्या वहीं हत्या की योजना बनी थी? पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन और बातचीत के रिकॉर्ड खंगाल रही है.
क्या सिर्फ शादी टालना ही मकसद था?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि हत्या का कारण सिर्फ शादी टालना था या इसके पीछे कोई और वजह भी छिपी है. पुलिस मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और ट्रैवल हिस्ट्री को जोड़कर केस की पूरी टाइमलाइन बनाने में जुटी है.
घटना का दिन
यह मामला 18 जून का है. पुलिस के अनुसार, 26 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल अपनी मंगेतर सिया गोयल के साथ लोहागढ़ किले घूमने गया था. आरोप है कि पहले से तय योजना के तहत चेतन वहां पहुंचा. सिया ने बैठकर इशारा किया और उसी समय चेतन ने पीछे से धक्का देकर केतन को खाई में गिरा दिया. मौके पर ही उसकी मौत हो गई. शुरुआत में इसे हादसा माना गया लेकिन बाद में जांच में हत्या की साजिश का खुलासा हुआ.
डिजिटल सबूतों पर नजर
पुलिस का कहना है कि इस केस की सबसे अहम कड़ी मोबाइल फोन से मिलने वाले सबूत हैं. आरोपियों ने वॉट्सएप चैट और कॉल हिस्ट्री डिलीट कर दी थी. यहां तक कि रीसायकल बिन भी खाली कर दिया गया. अब फोरेंसिक लैब में डेटा रिकवर करने की कोशिश हो रही है. पुलिस को उम्मीद है कि इससे हत्या की योजना और इसमें शामिल लोगों की भूमिका साफ हो जाएगी.
चेतन और सिया की पहचान
जांच में सामने आया है कि चेतन चौधरी की पहचान सिया के भाई साहिल गोयल से क्रिकेट के जरिए हुई थी. साहिल और चेतन साथ में मैच खेलते थे. इसी दौरान सिया भी कई बार वहां मौजूद रहती थी. बाद में 2025 में एक दिवाली पार्टी में दोनों की मुलाकात हुई और बातचीत बढ़ने लगी.
कॉल रिकॉर्ड से खुलासा
पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगाले तो पता चला कि जनवरी से दोनों ने 2,004 बार फोन पर बात की. कुल बातचीत करीब 238 घंटे की रही. अब पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि आखिर इन कॉल्स में क्या बातें होती थीं और क्या हत्या की योजना इन्हीं बातचीतों में बनी थी?
ये भी पढ़ें-कब रुकेगा पेपर लीक का खेल? NEET के बाद अब TET, 4 लाख भावी शिक्षकों की मेहनत पर पानी
पुणे मर्डर केस में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. शादी से बचने की चाह, सामाजिक दबाव और व्यक्तिगत रिश्तों की उलझन ने इस केस को और पेचीदा बना दिया है. पुलिस की जांच अब डिजिटल सबूतों और कॉल रिकॉर्ड पर टिकी है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि हत्या का असली मकसद क्या था और इसमें कितने लोग शामिल थे.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

