हिमाचल प्रदेश में भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) के लंबित बिजली बकायों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आए महत्वपूर्ण फैसले पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है. प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष राजीव बिंदल ने इस निर्णय को राज्य की जनता और उसके अधिकारों की एक बड़ी जीत करार दिया है.
केंद्र और बीजेपी सरकारों के योगदान को सराहा
राजीव बिंदल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर और केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस दशकों पुराने विवाद को सुलझाने में केंद्र का सहयोग अहम रहा है. उन्होंने इसे दशकों के लंबे कानूनी संघर्ष का परिणाम बताया, जिसकी मजबूत नींव पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार के कार्यकाल में 27 सितंबर 2011 को आए सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से पड़ी थी जिसमें हिमाचल के 7.19 प्रतिशत हिस्से को कानूनी मान्यता मिली थी.
कांग्रेस पर उठाए सवाल
कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए बिंदल ने सवाल किया कि वर्ष 2011 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा राज्य के अधिकार तय किए जाने के बावजूद, साल 2012 में सत्ता में लौटने के बाद कांग्रेस सरकार लंबित बकाये क्यों नहीं हासिल कर पाई. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कानूनी और प्रशासनिक लड़ाई में 1966 के पंजाब पुनर्गठन से लेकर विभिन्न चरणों में बीजेपी सरकारों (चाहे वह धूमल सरकार हो या 2017 से 2022 के बीच जयराम ठाकुर की सरकार) का महत्वपूर्ण योगदान रहा है.
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सीएम सुक्खू को दी सलाह
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को आड़े हाथों लेते हुए बीजेपी अध्यक्ष ने आग्रह किया कि वे इस मामले में केवल राजनीतिक श्रेय लेने की कोशिश न करें, बल्कि राज्य की जनता के सामने इस पूरे विवाद का प्रामाणिक इतिहास रखें. उन्होंने कहा कि हालांकि बकाये की गणना, टैरिफ और पूंजीगत लागत जैसे जटिल मुद्दों को सुलझाने में समय लगा, लेकिन अंततः केंद्र और राज्य के सहयोगात्मक प्रयासों से ही यह ऐतिहासिक मुकाम हासिल हुआ है.
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