रक्षाबंधन पर बहनों का अनमोल तोहफा
Kidney Donation: उत्तराखंड के किच्छा निवासी 40 वर्षीय जितेंद्र गंगवार लंबे समय से क्रॉनिक किडनी डिज़ीज़ से जूझ रहे थे. भाई की हालत देखकर उनकी 45 वर्षीय अविवाहित बहन बीना गंगवार ने बिना किसी झिझक के अपनी किडनी देने का फैसला किया.
सफल ट्रांसप्लांट और भावुक पल
जुलाई के अंत में ग्रेटर नोएडा के शारदा अस्पताल में जितेंद्र का सफल किडनी ट्रांसप्लांट हुआ. ऑपरेशन के बाद जितेंद्र ने भावुक होकर कहा कि इस बार का रक्षाबंधन उनके लिए सबसे खास है और ऐसी बहन हर भाई को मिले.
दूसरी मिसाल: सोनाली का त्याग
इसी तरह सुप्रियो भी लंबे समय से किडनी की गंभीर बीमारी से जूझ रहे थे. डॉक्टरों ने साफ कहा कि ट्रांसप्लांट ही उनका इलाज है. ऐसे कठिन समय में उनकी बहन सोनाली ने आगे बढ़कर अपनी किडनी देने का निर्णय लिया और भाई की ज़िंदगी बचाई.
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रिश्ते का असली अर्थ
इन दोनों कहानियों ने साबित कर दिया कि भाई‑बहन का रिश्ता सिर्फ राखी बांधने तक सीमित नहीं है. यह वह बंधन है जिसमें बहन अपने भाई के लिए अपनी जान तक दांव पर लगा सकती है. रक्षाबंधन के मौके पर सामने आई ये मिसालें त्याग, प्रेम और विश्वास की असली तस्वीर पेश करती हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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