चौक के नाम पर सियासी बवाल
Ranchi Chowk Name Change: झारखंड की राजधानी रांची में एक चौक का नाम बदलने को लेकर सियासी घमासान शुरू हो गया है. शहर के वीआईपी इलाके हरमू स्थित अरुण श्रीधर वैद्य चौक को नया नाम देने की कोशिश के बाद बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं. मामला इतना बढ़ गया कि दिन में लगाए गए बोर्ड को रात में हटाने तक की नौबत आ गई.
बीजेपी ने किया नए नाम का ऐलान
बुधवार को बीजेपी की ओर से एक कार्यक्रम आयोजित कर जनरल ए.एस. वैद्य चौक का नाम बदलकर “विकसित भारत सेवा संकल्प चौक” रखने की घोषणा की गई. इस मौके पर केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, झारखंड बीजेपी अध्यक्ष आदित्य साहू, कई विधायक और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान नए नाम का बोर्ड भी लगाया गया और इसे विकसित भारत के संकल्प से जोड़कर पेश किया गया.
कांग्रेस ने किया कड़ा विरोध
बीजेपी की इस पहल को कांग्रेस ने तुरंत चुनौती दी. पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी सार्वजनिक स्थल का नाम बदलने का अधिकार किसी राजनीतिक दल को नहीं है. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बीजेपी मनमाने तरीके से फैसले ले रही है.
कांग्रेस नेताओं के विरोध के बाद देर रात मौके पर लगाए गए नए बोर्ड और अन्य सामग्री को हटा दिया गया. पार्टी का कहना है कि झारखंड किसी एक दल की निजी संपत्ति नहीं है कि वह अपनी मर्जी से किसी भी चौक या जगह का नाम बदल दे.
बीजेपी ने दिया पलटवार
विवाद बढ़ने के बाद बीजेपी ने भी कांग्रेस पर निशाना साधा. पार्टी नेताओं का कहना है कि उनका उद्देश्य विकसित भारत के विचार को आगे बढ़ाना है. बीजेपी का दावा है कि जिस चौक का नाम जनरल वैद्य के नाम पर रखा गया था, वहां उनके नाम का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है.
पार्टी का यह भी कहना है कि वहां न तो उनकी जयंती मनाई जाती है और न ही शहादत दिवस पर कोई विशेष कार्यक्रम आयोजित होता है. बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि कांग्रेस को “विकसित भारत” की अवधारणा से परेशानी है.
कौन थे जनरल ए.एस. वैद्य?
जिस चौक के नाम को लेकर विवाद चल रहा है, उसका नाम करीब साढ़े तीन दशक पहले भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल अरुण श्रीधर वैद्य के सम्मान में रखा गया था.
जनरल वैद्य भारतीय सेना के उन चुनिंदा अधिकारियों में शामिल थे जिन्हें दो बार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था. वर्ष 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध में उनकी भूमिका बेहद अहम मानी जाती है.
ऑपरेशन ब्लू स्टार से भी जुड़ा था नाम
सेना प्रमुख के रूप में जनरल वैद्य का नाम ऑपरेशन ब्लू स्टार से भी जुड़ा रहा. सेवानिवृत्ति के बाद खालिस्तान समर्थक आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी थी. देश की सुरक्षा और सैन्य सेवाओं में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें विशेष सम्मान के साथ याद किया जाता है.
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नगर निगम में नहीं आया कोई प्रस्ताव
इस पूरे मामले में एक अहम तथ्य यह भी सामने आया है कि चौक का नाम बदलने को लेकर नगर निगम के स्तर पर कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं लाया गया था. ऐसे में अब यह मुद्दा केवल नाम बदलने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का विषय बन गया है.
फिलहाल चौक के नाम को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी जारी है और यह विवाद राज्य की राजनीति में नई चर्चा का कारण बन गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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