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Uttarakhand Earthquake Siren Test: अगर आप उत्तराखंड में रहते हैं और अचानक तेज सायरन की आवाज सुनाई दे, तो अब आपको घबराने या भागने की जरूरत नहीं है. राज्य सरकार ने एक नई व्यवस्था लागू की है, जिसके तहत अब हर महीने की 9 तारीख को सुबह ठीक 11 बजे पूरे प्रदेश में भूकंप का सायरन बजेगा.
यह किसी असली खतरे की घंटी नहीं, बल्कि राज्य के ‘अर्थक्वेक अर्ली वार्निंग सिस्टम’ यानी भूकंप पूर्व चेतावनी प्रणाली का एक नियमित टेस्ट होगा.
आखिर हर महीने की 9 तारीख ही क्यों चुनी गई?
इस व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल लोगों के मन में यही उठ रहा है कि आखिर सरकार ने हर महीने की 9 तारीख को ही टेस्ट के लिए क्यों चुना? आपदा प्रबंधन विभाग (USDMA) के अधिकारियों के मुताबिक, इसके पीछे बहुत ही व्यावहारिक और सोची-समझी वजहें हैं.
पहली बात यह कि अगर किसी दिन (जैसे हर महीने के पहले सोमवार या शनिवार) को तय किया जाता, तो हर महीने तारीख बदलती रहती. इससे आम लोगों, स्कूलों और दफ्तरों में असमंजस बना रहता. एक निश्चित तारीख यानी ‘9 तारीख’ तय करने से हर किसी के लिए यह याद रखना बेहद आसान हो जाता है.
दूसरी वजह प्रशासनिक सहूलियत है. महीने के शुरुआती 1 से 7 दिनों में सरकारी विभागों में पिछले महीने की रिपोर्टिंग, बैठकों और कागजी काम का भारी दबाव रहता है. 9 तारीख तक आते-आते यह दबाव कम हो जाता है, जिससे आपदा प्रबंधन टीम बिना किसी रुकावट के मॉक ड्रिल आयोजित कर पाती है.
तीसरी बात, सुबह 11 बजे का समय चुनने का मकसद वर्किंग डेज का फायदा उठाना है. इस वक्त स्कूल, दफ्तर और बाजार पूरी तरह खुले होते हैं, जिससे सायरन की आवाज ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचे और वे इसका अभ्यास कर सकें.
169 सेंसर और भूदेव ऐप से मिलेगी सुरक्षा
उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील ‘जोन 4’ और ‘जोन 5’ में आता है. ऐसे में भूकंप आने से कुछ सेकंड पहले मिलने वाली चेतावनी भी जान-माल के बड़े नुकसान को टाल सकती है.
फिलहाल राज्य में आईआईटी रुड़की के सहयोग से 169 सेंसर और 112 सायरन लगाए गए हैं. सिर्फ सायरन ही नहीं, जिन लोगों के फोन में ‘भूदेव’ (Bhudev) ऐप डाउनलोड है, उन्हें भी 9 तारीख को सुबह 11 बजे टेस्ट का अलर्ट सुनाई देगा. इसके लिए मोबाइल में इंटरनेट और लोकेशन ऑन रखना जरूरी है.
हाल ही में 6 अक्टूबर की रात चमोली के थराली में आए 4.9 तीव्रता के भूकंप के दौरान इस सिस्टम ने तरंगें पहुंचने से पहले ही लोगों को अलर्ट कर दिया था. सरकार की अपील है कि लोग सायरन की आवाज से परिचित हों, ताकि वास्तविक आपदा के समय वे सुरक्षित ठिकाने की ओर कदम बढ़ा सकें.
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-भारत एक्सप्रेस
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