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गणतंत्र के जश्न में विदेशी मेहमान: 2015 से 2026 तक… गणतंत्र दिवस पर कब-कौन आया भारत?

Republic Day Chief Guest History: भारत के 77वें गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के नेता मुख्य अतिथि हैं. जानें 2015 में ओबामा से लेकर 2026 तक राजपथ (कर्तव्य पथ) पर कौन-कौन से विदेशी मेहमान आए.

Republic Day Chief Guest History

AI से बनाई गई फोटो

Republic Day Chief Guest History: भारत अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. कर्तव्य पथ पर देश की सैन्य ताकत और सांस्कृतिक विरासत का भव्य प्रदर्शन हो रहा है. हर साल की तरह, इस साल भी दुनिया की नजरें उस ‘वीवीआईपी’ कुर्सी पर टिकी हैं, जिस पर भारत के मुख्य अतिथि विराजमान हैं. इस बार भारत ने परंपरा से हटकर एक नहीं, बल्कि दो यूरोपीय दिग्गजों को आमंत्रित किया है. यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए हैं.

2026 के लिए मेहमानों का चयन दर्शाता है कि भारत अपनी विदेश नीति में यूरोप को कितना महत्व दे रहा है. चाहे वह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बात हो, ग्रीन एनर्जी हो या फिर रक्षा सहयोग, भारत और यूरोपीय संघ के रिश्ते एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं. इन दो शीर्ष नेताओं की उपस्थिति बताती है कि भारत अब केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बड़े शक्तिशाली ब्लॉकों के साथ सीधे जुड़ रहा है.

मोदी युग में मुख्य अतिथियों की कूटनीति

गणतंत्र दिवस पर किसी विदेशी मेहमान को बुलाना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि भारत की विदेश नीति का सबसे बड़ा संकेत होता है. अगर हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के पिछले 11 वर्षों पर नजर डालें, तो मुख्य अतिथियों की सूची भारत की बदलती प्राथमिकताओं की कहानी कहती है.

अमेरिका और ‘लुक वेस्ट’ पॉलिसी

सबसे धमाकेदार शुरुआत 2015 में हुई थी, जब तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा मुख्य अतिथि बने थे. यह पहली बार था जब कोई अमेरिकी राष्ट्रपति भारत के गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुआ. इसने भारत-अमेरिका परमाणु समझौते और रणनीतिक साझेदारी को एक नई ऊंचाई दी थी.

भारत का ‘सदाबहार’ दोस्त

फ्रांस इकलौता ऐसा देश है जिसे पिछले एक दशक में दो बार यह सम्मान मिला. 2016 में राष्ट्रपति फ्रांस्वा होलांद और फिर 2024 में राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन कर्तव्य पथ पर आए. यह राफेल फाइटर जेट्स और रक्षा क्षेत्र में भारत की फ्रांस पर निर्भरता और अटूट भरोसे को दर्शाता है.

एक्ट ईस्ट और आसियान का शक्ति प्रदर्शन

साल 2018 का गणतंत्र दिवस इतिहास में दर्ज हो गया. इस साल भारत ने किसी एक देश को नहीं, बल्कि पूरे आसियान (ASEAN) समूह के 10 देशों के नेताओं को एक साथ मंच पर आमंत्रित किया. यह भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ का सबसे बड़ा प्रदर्शन था, जिसने चीन को कड़ा संदेश दिया.

खाड़ी देश और अफ्रीका से जुड़ाव

2017 में अबू धाबी के युवराज शेख मोहम्मद बिन जायद (UAE) का आना और 2023 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी का आगमन, भारत की अरब देशों के साथ बढ़ती नजदीकी का सबूत था. वहीं, 2019 में दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा की उपस्थिति ने महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला की साझा विरासत को याद दिलाया.

कोरोना काल का सन्नाटा

इतिहास में ऐसा बहुत कम हुआ जब गणतंत्र दिवस बिना किसी मुख्य अतिथि के मनाया गया हो. 2021 और 2022 में कोविड-19 महामारी के कारण कोई विदेशी मेहमान नहीं आ सका. 2021 में ब्रिटेन के तत्कालीन पीएम बोरिस जॉनसन को आना था, लेकिन कोरोना के नए स्ट्रेन के कारण उनका दौरा रद्द करना पड़ा था.

2015 से 2026 तक पूरी लिस्ट (Republic Day Chief Guest List)

  • 2015: बराक ओबामा (राष्ट्रपति, अमेरिका)
  • 2016: फ्रांस्वा होलांद (राष्ट्रपति, फ्रांस)
  • 2017: शेख मोहम्मद बिन जायद (युवराज, अबू धाबी)
  • 2018: आसियान देशों के 10 प्रमुख नेता
  • 2019: सिरिल रामफोसा (राष्ट्रपति, दक्षिण अफ्रीका)
  • 2020: जेयर बोल्सोनारो (राष्ट्रपति, ब्राजील)
  • 2021: कोई नहीं (कोविड-19)
  • 2022: कोई नहीं (कोविड-19)
  • 2023: अब्देल फतह अल-सिसी (राष्ट्रपति, मिस्र)
  • 2024: इमैनुएल मैक्रॉन (राष्ट्रपति, फ्रांस)
  • 2025: प्रबोवो सुबिआंतो (राष्ट्रपति, इंडोनेशिया)
  • 2026: एंटोनियो कोस्टा (अध्यक्ष, यूरोपीय परिषद) और उर्सुला वॉन डेर लेयेन (अध्यक्ष, यूरोपीय आयोग)

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भारत बन रहा है पावर सेंटर

आज 2026 में जब एंटोनियो कोस्टा और उर्सुला वॉन डेर लेयेन भारतीय सेना के मार्च पास्ट को देख रहे हैं, तो यह महज एक परेड नहीं है. यह भारत की बढ़ती ग्लोबल धमक का प्रतीक है. 2015 में ओबामा से शुरू हुआ यह सफर आज यूरोपीय संघ के शीर्ष नेतृत्व तक आ पहुंचा है, जो बताता है कि भारत अब दुनिया के हर शक्ति केंद्र (Power Center) के लिए एक अनिवार्य भागीदार बन चुका है.



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