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12 साल से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म पर आरोपी को कठोर उम्रकैद और ₹2 लाख जुर्माना, अलीगढ़ की CBI विशेष अदालत का फैसला

अलीगढ़ की सीबीआई विशेष पोक्सो अदालत ने 12 साल से कम उम्र की बच्ची से दुष्कर्म और यौन शोषण के मामले में आरोपी नवीन कुमार को कठोर आजीवन कारावास और ₹2 लाख जुर्माने की सजा सुनाई.

CBI POCSO case

अलीगढ़, 26 मई 2025: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की विशेष पोक्सो अदालत, अलीगढ़ ने सोमवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी नवीन कुमार को 12 वर्ष से कम आयु की बच्ची के साथ दुष्कर्म और यौन शोषण के गंभीर मामले में कठोर आजीवन कारावास और ₹2 लाख का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई.

IPC की धाराओं के अंतर्गत दर्ज किया गया मामला

यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं तथा पोक्सो अधिनियम, 2012 और आईटी अधिनियम, 2000 के अंतर्गत दर्ज किया गया था. आरोपी नवीन कुमार, पुत्र स्वर्गीय वीरेंद्र सिंह, निवासी — रामपुर, तहसील गभाना, जिला अलीगढ़, उत्तर प्रदेश के खिलाफ यह आरोप था कि वह नाबालिग बच्चियों से जुड़ी अश्लील सामग्री को इलेक्ट्रॉनिक रूप में संग्रहित कर रहा था.

CBI की OCSAE यूनिट ने दर्ज किया था मामला

सीबीआई की OCSAE (Online Child Sexual Abuse and Exploitation) यूनिट ने 12 अगस्त 2024 को यह मामला दर्ज किया था. जांच के दौरान CBI ने INTERPOL के ICSE डेटाबेस और गूगल की साइबर टिपलाइन रिपोर्ट्स (I4C, गृह मंत्रालय के माध्यम से) की मदद से डिजिटल सबूत इकट्ठे किए.

जांच में सामने आई ये बात

जांच में यह सामने आया कि आरोपी ने वर्ष 2021–22 के बीच 12 वर्ष से कम आयु की एक बच्ची के साथ बार-बार यौन शोषण किया, उसकी वीडियो रिकॉर्डिंग की, और उसे अश्लील गतिविधियों के लिए मजबूर किया. इसके अतिरिक्त, आरोपी ने पीड़िता को पोर्नोग्राफिक उद्देश्यों के लिए भी इस्तेमाल किया.

CBI ने आरोपी को सितंबर में किया था गिरफ्तार

CBI ने आरोपी को 6 सितंबर 2024 को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद से ही वह न्यायिक हिरासत में था. जांच पूरी कर CBI ने त्वरित रूप से चार्जशीट दाखिल की और मुकदमा 6 महीने के भीतर पूरा हो गया.

विशेष पोक्सो अदालत, अलीगढ़ ने 23 मई 2025 को नवीन कुमार को दोषी ठहराया और आज 26 मई 2025 को उसे निम्नलिखित धाराओं के तहत सजा सुनाई:

•भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत 12 वर्ष से कम आयु की बालिका से दुष्कर्म
•पोक्सो अधिनियम, 2012 के तहत बाल यौन शोषण और बच्चों को अश्लील उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल करना
•सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का प्रकाशन और प्रसारण

सीबीआई ने खुद संज्ञान लेते हुए अपराध का लगाया पता

इस मामले में विशेष बात यह रही कि पीड़िता अथवा उसके परिजनों ने अपराध की कोई शिकायत नहीं की थी. सीबीआई ने खुद संज्ञान लेते हुए इस अपराध का पता लगाया और महज 6 हफ्तों में जांच पूरी कर ली.

CBI की इस जांच प्रक्रिया ने कर दिखाया सिद्ध

CBI की इस निष्पक्ष और तीव्र जांच प्रक्रिया ने यह सिद्ध कर दिया कि एजेंसी बच्चों के साथ होने वाले गंभीर अपराधों को लेकर पूरी तरह सजग और प्रतिबद्ध है. अदालत के इस फैसले से यह स्पष्ट संकेत गया है कि ऐसे अपराधों में दोषियों को सख्त सजा देकर कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाया जा रहा है.

-भारत एक्सप्रेस 



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