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जंग के बीच चर्चा..! एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से क्या-क्या बात की?

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर बातचीत की. ऊर्जा आपूर्ति, होर्मुज स्ट्रेट सुरक्षा, चाबहार पोर्ट और क्षेत्रीय स्थिरता पर दोनों देशों ने चर्चा की..

पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी तीव्र संघर्ष के बीच विदेश मंत्री एस. जयशंकर(S Jaishankar) ने मंगलवार शाम को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर विस्तृत बातचीत की. यह जयशंकर की ओर से अराघची से तीसरी बातचीत थी. जयशंकर ने जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी बात की और क्षेत्रीय संकट पर विचारों का आदान-प्रदान किया.

जयशंकर ने क्या कहा?

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर बताया कि आज शाम ईरान के विदेश मंत्री अराघची के साथ संघर्ष से संबंधित नवीनतम घटनाक्रम पर विस्तृत बातचीत हुई. हम संपर्क में रहने पर सहमत हुए. यह बातचीत ईरान द्वारा मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त करने की घोषणा के बाद हुई है. मोजतबा को सर्वोच्च नेता नियुक्त करने की घोषणा उनके पिता, अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले में हत्या के कुछ दिनों बाद की गई.

बातचीत में क्या-क्या मुद्दे उठे?

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, जयशंकर और अराघची के बीच बातचीत में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर चर्चा हुई:

  • ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमलों की नवीनतम स्थिति और उनके प्रभाव.
  • ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ते असर और होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से तेल व्यापार की सुरक्षा.
  • भारत-ईरान के बीच द्विपक्षीय संबंधों और चाबहार पोर्ट परियोजना की स्थिति.
  • क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने और युद्धविराम की अपील.
  • दोनों देशों के बीच संपर्क में रहने और आगे की कूटनीतिक पहल पर सहमति.

मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति पर भी हुई बात

इससे पहले जयशंकर ने ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति पर भी बात की और शांति की अपील दोहराई. उन्होंने कहा कि भारत हमेशा बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के माध्यम से विवादों को सुलझाने का समर्थन करता है.

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विदेश सचिव का ईरानी दूतावास दौरा

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में ईरानी दूतावास पहुंचकर कंडोलेंस बुक पर हस्ताक्षर किए और अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर संवेदना व्यक्त की.यह दौरा भी भारत की कूटनीतिक संतुलन की नीति को दर्शाता है, जहां अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी है, लेकिन ईरान के साथ भी मजबूत आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्ते हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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