Sanatan Yatra:पावन ब्रजभूमि वृंदावन में ‘सनातन एकता यात्रा’ ने आध्यात्मिकता, संस्कृति और सामाजिक चेतना का अनूठा संगम प्रस्तुत किया. कार्यक्रम में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद् के अध्यक्ष एवं निरंजनी अखाड़े के सभापति श्रीमहंत रवींद्र पुरी तथा बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की संयुक्त उपस्थिति ने यात्रा को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया. दोनों संतों का विराट आशीर्वचन सुनने के लिए हजारों भक्त दूर-दूर से पहुंचे.

वृंदावन में दिखा आस्था का सैलाब
सनातन एकता यात्रा के दौरान वृन्दावन की सड़कों पर श्रद्धालुओं का जनसागर उमड़ पड़ा. भजन-कीर्तन, शंखनाद, ढोल-नगाड़ों की ध्वनि और जय-घोष ने वातावरण को आध्यात्मिक चेतना से भर दिया. दोनों संतों के दर्शन मात्र से भक्तों के चेहरे खिल उठे. कई श्रद्धालुओं ने इसे लंबे समय बाद ब्रजभूमि में दिखी आध्यात्मिक एकता का अनोखा दृश्य बताया.
Santan Yatra के चार बड़े संकल्प
इस यात्रा को केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन समाज के पुनर्जागरण का आंदोलन माना जा रहा है। इसके प्रमुख उद्देश्य साफ तौर पर सामाजिक और सांस्कृतिक भविष्य का खाका पेश करते हैं—
हिंदुओं को संगठित कर राष्ट्र को सांस्कृतिक आधार पर हिंदू राष्ट्र बनाना , संतों ने कहा कि सनातन की रक्षा ही राष्ट्र रक्षा है। जब समाज एकजुट होगा, तभी भारत अपनी सांस्कृतिक पहचान को और मजबूती से स्थापित कर सकेगा.
“कान्हा की कालिंदी निर्मल हो, अविरल बहे.”
यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए सामाजिक भागीदारी पर जोर दिया गया.
ब्रज क्षेत्र को पूरी तरह मांस-मदिरा मुक्त बनाना.
ब्रजभूमि को भगवान श्रीकृष्ण की तपोभूमि बताते हुए संतों ने कहा कि यहां की पवित्रता बनाए रखना हर भक्त का उत्तरदायित्व है.
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर दिव्य और भव्य मंदिर निर्माण का संकल्प.
यात्रा में यह संदेश स्पष्ट रूप से दिया गया कि जन्मभूमि पर भविष्य में बनने वाला भव्य मंदिर भारत की आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाई देगा. (Sanatan Yatra)

श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा सनातन धर्म में है विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता
श्रीमहंत रवींद्र पुरी ने कहा कि आज हम सब यहाँ एक ऐसे पावन अवसर पर एकत्र हुए हैं, जहाँ भक्ति, सेवा और संकल्प—तीनों का अद्भुत संगम दिखाई देता है. यह अवसर है पूज्यनीय धीरेन्द्र शास्त्री जी की पदयात्रा का, जो केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, अपितु समाज को जागृत करने वाला एक आध्यात्मिक अभियान है. धीरेन्द्र शास्त्री जी की यह पदयात्रा हमें यह संदेश देती है कि धर्म केवल मंदिरों में नहीं, बल्कि मार्गों पर भी चलता है, साधना केवल आसन पर नहीं, बल्कि कदम ताल से भी होती है.
अखाड़ा परिषद सदैव ऐसे संतों का सम्मान करता है जो समाज में प्रकाश फैलाने का कार्य करते हैं. धीरेन्द्र शास्त्री जी ने अपने तप, अपने ज्ञान और अपनी विनम्रता से यह सिद्ध किया है कि सच्चा संत वही है, जो समाज के बीच जाकर समाज की पीड़ा को समझे.
उनकी पदयात्रा का उद्देश्य केवल स्थान-स्थान पर जाना नहीं है—
बल्कि हर मनुष्य के हृदय तक पहुँचना, युवा पीढ़ी में संस्कारों का संचार करना और समाज को धर्म, सत्य और सदाचार की राह दिखाना है. (Sanatan Yatra)
श्रीमहंत रवींद्र पूरी ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि जब संसार भौतिकता की ओर भाग रहा है, तब ऐसे संतों का आगे आना अत्यंत आवश्यक है. यदि संत ही आगे बढ़कर समाज की बुराइयों का विरोध नहीं करेंगे, तो फिर कौन करेगा?
सनातन एकता पदयात्रा हमें अनुशासन सिखाती है, धैर्य सिखाती है, और यह बताती है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़े परिवर्तन ला सकते हैं. संत धीरेन्द्र शास्त्री जी के हर कदम में लोककल्याण की भावना निहित है.
अखाड़ा परिषद की ओर से हम उन्हें साधुवाद देते हैं, उनके इस पवित्र अभियान को आशीर्वाद देते हैं, और प्रार्थना करते हैं कि भगवान उन्हें शक्ति दें, स्वास्थ्य दें और समाज सेवा का यह दिव्य कार्य यूँ ही निरंतर आगे बढ़ता रहे. अंत में, मैं सभी भक्तों से निवेदन करता हूँ कि संतों के कदमों से जुड़ें, उनके संदेशों को जीवन में अपनाएँ, क्योंकि यही मार्ग हमें धर्म, शांति और समृद्धि की ओर ले जाता है. (Sanatan Yatra)
धीरेन्द्र शास्त्री ने कहा ब्रज की पवित्रता और यमुना की रक्षा हमारा धर्म
बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने सनातन एकता यात्रा को ब्रजभूमि की आत्मा बताया. उन्होंने कहा कि “हम सब एक ही सनातन परिवार का हिस्सा हैं। हमारी जिम्मेदारी है कि हम ब्रज को पवित्र रखें, यमुना को बचाएं और अपने धर्म-संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं” साथ ही उन्होंने मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थली पर जल्दी भव्य मंदिर बनाए जाने की मांग की.
भक्तों में उमंग, यात्रा बनी सामाजिक बदलाव का जनांदोलन
श्रद्धालुओं का कहना था कि यह यात्रा न केवल भक्ति का आयोजन है, बल्कि सनातन समाज की एकता का प्रतीक भी है.
कई भक्तों ने इसे राम मंदिर आंदोलन के बाद सनातन चेतना का सबसे बड़ा सकारात्मक सामाजिक संदेश बताया.
वृंदावन की ‘ Sanatan Yatra’ ने यह सिद्ध कर दिया कि सनातन धर्म आज भी समाज को दिशा देने की सबसे बड़ी शक्ति है.
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी और बागेश्वर धाम सरकार धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की उपस्थिति, उनके संदेश और यात्रा के संकल्पों ने इसे धर्म, राष्ट्र, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का अद्भुत संगम बना दिया.
भारत एक्सप्रेस
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