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‘सपने न देखना अपराध है, लेकिन सिर्फ गुनगुनाने से काम नहीं चलेगा’; छात्रों से परीक्षा पे चर्चा में बोले पीएम मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने परीक्षा पे चर्चा में छात्रों को बताया कि सुविधा का इंतजार किए बिना मेहनत करें और सपनों को कर्म के साथ साकार करें.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह परीक्षा पे चर्चा के दौरान छात्रों से बातचीत की और कहा कि ऐसा नहीं सोचना चाहिए कि सुविधा होगी तभी क्षमता आएगी.” प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सोच सही नहीं है. हमारे देश में बोर्ड परीक्षा में छोटे-छोटे गावों के बच्चे अच्छे अंक हासिल कर रहे हैं.

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर देखे गए एक वीडियो का भी जिक्र बच्चों से किया. उन्होंने कहा कि इस वीडियो में एक व्यक्ति बैलगाड़ी में सामान भर कर रोजी रोटी कमाने के लिए जा रहा था. वहीं बैलगाड़ी के ऊपर उनका बच्चा सामान के ऊपर पूरे ध्यान से पढ़ाई कर रहा था. यानी वह बच्चा कंफर्ट की चिंता नहीं कर रहा था. बच्चों ने अपने सपनों के विषय में भी प्रधानमंत्री से प्रश्न किए.

लद्दाख की एक छात्रा ने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या बच्चों को बड़े सपने देखने चाहिए और सपनों को कैसे पूरा करें. इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा कि सपने न देखना तो क्राइम है. प्रधानमंत्री ने कहा कि लेकिन सपनों को गुनगुनाते रहना कभी काम नहीं आता है. प्रधानमंत्री ने छात्रों को बताया कि जीवन में सदैव कर्म को प्रधान रहना चाहिए. उन्होंने कहा, “मैं जहां हूं वहां मुझे सफल होना है, तभी मैं आगे जाऊँगा.”

उन्होंने कहा कि अपने सपनों से जुड़े विषयों पर धीरे-धीरे रुचि बढ़ानी चाहिए और उनपर मेहनत करनी चाहिए. उन्होंने बच्चों से कहा कि हमें अपने मन के सपनों को हर किसी के आगे नहीं बोलते रहना चाहिए, लेकिन उन पर दृढ़ रहना चाहिए और उनको लिखकर रखना चाहिए. प्रधानमंत्री ने छात्रों को संबंधित विषय से जुड़े लोगों की बायोग्राफी पढ़ने की सलाह भी दी.

प्रधानमंत्री ने छात्रों को वैदिक मैथ से सफलता की राह दिखाई

प्रधानमंत्री ने छात्रों से वैदिक मैथ पर भी बात की. दरअसल जब कुछ छात्रों ने गणित की तैयारी पर प्रधानमंत्री से प्रश्न किए तो प्रधानमंत्री ने उन्हें वैदिक मैथ के बारे में बताया. प्रधानमंत्री ने वैदिक मैथ से सीखने की सलाह दी. गौरतलब है कि छात्रों के मार्गदर्शन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ भी लिखी है. इस पुस्तक का उद्देश्य युवाओं व छात्रों में परीक्षा के तनाव को कम करना है. पुस्तक में बताया गया है कि परीक्षा को कैसे एक उत्सव के रूप में लेना चाहिए. यह पुस्तक व्यावहारिक सुझावों के माध्यम से तनावमुक्त रहने व सफलता का मार्ग बताती है.

कई शिक्षाविद मानते हैं कि इस पुस्तक के माध्यम से प्रधानमंत्री ने शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक और दूरदर्शी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है. इसमें छात्रों के ज्ञान और समग्र विकास को प्राथमिक महत्व दिया जाता है. प्रधानमंत्री हर किसी से परीक्षाओं को सही परिप्रेक्ष्य में रखने का आग्रह करते हैं, बजाय इसके कि इसे जीवन और मौत की स्थिति में अनावश्यक तनाव और दबाव की वजह बनाया जाए.

इस वर्ष परीक्षा पे चर्चा का यह 9वां संस्करण था. यह संवाद कार्यक्रम कक्षा 6 और उससे ऊपर के छात्रों, शिक्षकों एवं अभिभावकों के लिए था. परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 4 करोड़ 50 लाख 13,379 लोगों ने परीक्षा पे चर्चा का हिस्सा बनने के लिए अपना रजिस्ट्रेशन करवाया था. इनमें छात्र, शिक्षक व अभिभावक शामिल हैं. शुक्रवार को आयोजित इस संवाद कार्यक्रम को हजारों विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों के लिए उपलब्ध कराया गया. कार्यक्रम को लाइव देखने की समुचित व्यवस्था की गई थी.

दूरदर्शन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाइव प्रसारण

इस संवाद के माध्यम से प्रधानमंत्री सभी से यह आग्रह करते आए हैं कि परीक्षाओं को सही परिप्रेक्ष्य में देखें, उन्हें जीवन-मरण का प्रश्न बनाकर अनावश्यक तनाव और दबाव न पैदा करें. इस वर्ष भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया. परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दूरदर्शन के चैनलों डीडी नेशनल, डीडी न्यूज़, डीडी इंडिया सहित प्रमुख निजी टीवी चैनलों पर किया गया. इसके अलावा आकाशवाणी (एमडब्ल्यू एवं एफएम) पर भी इसका प्रसारण हुआ. डिजिटल माध्यमों पर यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री कार्यालय, शिक्षा मंत्रालय, दूरदर्शन, माईगोव जैसे वेब प्लेटफॉर्म्स तथा यूट्यूब (शिक्षा मंत्रालय), फेसबुक लाइव और स्वयं प्रभा चैनलों पर उपलब्ध था.

नोट- यह खबर एजेंसी (IANS) फीड से सीधे पब्लिश की गई है. इसमें किसी भी जानकारी को नहीं बदला गया है. खबर को पढ़ने लायाक बनाने के लिए लिए केवल हेडलाइन बदली गई है. वहीं पैराग्राफ से पहले सबहेड जोड़े गए हैं. इस स्टोरी को लेकर भारत एक्सप्रेस की किसी भी तरह की नैतिक जिम्मेदारी नहीं होगी.

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