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सत्य निकेतन हादसा: 7 मौतों से 3 गिरफ्तारियों और हाई कोर्ट के आदेश तक, कब-कब क्या हुआ? पढ़ें पूरा टाइमलाइन

Saty Niketan Accident: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत और 5 लोग घायल हुए. MCD के पांच अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई. जानें 6 से 8 सितंबर तक इस हादसे में कब क्या हुआ.

Saty Niketan Accident Timeline: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी इमारत के अचानक भरभराकर गिरने की घटना ने राजधानी में इमारतों की सुरक्षा और प्रशासन की निगरानी पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत हुई है, जबकि 5 लोग घायल बताए जा रहे हैं. हादसे के बाद करीब 27 घंटे तक मलबे में जिंदगी तलाशने का अभियान चलता रहा. इस दौरान पुलिस, दमकल, NDRF और SDRF की टीमें लगातार मौके पर जुटी रहीं.

रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज की और इमारत से जुड़े तीन लोगों को गिरफ्तार किया. इनमें मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला गुप्ता और बेटा महेश गुप्ता शामिल हैं. दूसरी तरफ, प्रशासनिक स्तर पर भी जिम्मेदारी तय करने की कोशिश शुरू हुई और MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया.

आइए, जानते हैं 6 सितंबर से 8 सितंबर तक इस पूरे मामले में कब क्या हुआ.

6 सितंबर, दोपहर करीब 1:30 बजे: अचानक ढह गई पांच मंजिला इमारत

सत्य निकेतन में दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास छात्रों के लिए इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला PG इमारत अचानक गिर गई. हादसे के वक्त बिल्डिंग में मरम्मत का काम चल रहा था. जैसे ही इमारत गिरी, आसपास अफरा-तफरी मच गई और मलबे के नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका सामने आई.

करीब 1:30 बजे फायर सर्विस को घटना की सूचना मिली. इसके बाद पुलिस और राहत-बचाव एजेंसियों की टीमें मौके पर पहुंचीं.

हादसे के तुरंत बाद: शुरू हुआ लंबा रेस्क्यू ऑपरेशन

मलबे में लोगों के फंसे होने की जानकारी मिलते ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया गया. दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, NDRF और SDRF की टीमें मलबे को सावधानी से हटाने में जुट गईं.

मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचना आसान नहीं था. राहतकर्मियों को एक-एक हिस्से को हटाकर आगे बढ़ना पड़ा, ताकि अंदर मौजूद किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे. इस दौरान घायलों को निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया.

6 सितंबर की शाम: बढ़ने लगा मौतों का आंकड़ा

शाम होते-होते हादसे की गंभीरता सामने आने लगी. मलबे से निकाले गए कुछ लोगों की हालत बेहद गंभीर थी. AIIMS ट्रॉमा सेंटर पहुंचाए गए कुछ लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया.

देर रात तक मृतकों की संख्या बढ़कर 5 हो गई. वहीं, बचाव दल लगातार मलबे में फंसे बाकी लोगों को तलाश रहा था.

6 सितंबर की रात से 7 सितंबर की सुबह: रातभर चलता रहा बचाव अभियान

रात होने के बाद भी राहत और बचाव का काम नहीं रुका. टीमें रोशनी की व्यवस्था के बीच मलबा हटाती रहीं. करीब 2:30 बजे मलबे से एक और शव बरामद किया गया. इसके बाद मृतकों की संख्या 6 हो गई.

हादसे के करीब 16-17 घंटे बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी था. बचाव दल की कोशिश थी कि मलबे में फंसे किसी भी व्यक्ति को जिंदा बाहर निकाला जा सके.

7 सितंबर की सुबह: आसपास की इमारतों को लेकर भी चिंता

मुख्य इमारत के गिरने के बाद प्रशासन ने आसपास की बिल्डिंगों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाए. हादसे से सटी इमारत को खाली कराने के निर्देश दिए गए.

इसके साथ ही इलाके में बिना मंजूरी बनाई गई अतिरिक्त मंजिलों और आसपास संचालित PG की स्थिति की जांच के निर्देश भी दिए गए. सवाल यह था कि आखिर छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल हो रही इन इमारतों की सुरक्षा की नियमित जांच किस स्तर पर की जा रही थी.

7 सितंबर: MCD के पांच अधिकारी सस्पेंड

हादसे में प्रशासनिक लापरवाही की जांच के बीच दिल्ली सरकार ने MCD के पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया. इनमें डिप्टी कमिश्नर, सुपरिटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर शामिल हैं.

इस कार्रवाई से साफ हुआ कि जांच सिर्फ इमारत के मालिक तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि संबंधित अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी कितनी गंभीरता से निभाई.

7 सितंबर: दिल्ली हाई कोर्ट ने भी उठाए सुरक्षा पर सवाल

सत्य निकेतन हादसा दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंचा. कोर्ट में मामले से जुड़ी PIL पर सुनवाई हुई और अदालत ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली पुलिस, दिल्ली यूनिवर्सिटी और NHRC को नोटिस जारी किया.

अदालत ने खास तौर पर इस सवाल पर चिंता जताई कि छात्रों के रहने वाले PG और हॉस्टलों की सुरक्षा की निगरानी आखिर कौन करता है. हादसे ने राजधानी में ऐसी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.

7 सितंबर दोपहर से शाम: करीब 27 घंटे बाद रेस्क्यू पूरा

करीब 27 घंटे से ज्यादा समय तक चले अभियान के बाद मलबे में फंसे सभी लोगों को बाहर निकाल लिया गया. कुल 12 लोगों को मलबे से निकाला गया. इनमें 7 लोगों की जान चली गई, जबकि 5 घायल हुए. घायलों में तीन की हालत गंभीर बताई गई.

मृतकों में पांच छात्र बताए गए हैं. रेस्क्यू खत्म होने के साथ ही राहत अभियान का एक चरण पूरा हुआ, लेकिन हादसे के पीछे जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई.

7 सितंबर: भिवाड़ी से पकड़े गए बिल्डिंग मालिक

रेस्क्यू ऑपरेशन खत्म होने के बाद पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम गुप्ता की तलाश शुरू की. पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में लगाई गई थीं. आखिरकार उन्हें राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया गया.इसके बाद पुलिस ने हरिराम गुप्ता की पत्नी उर्मिला गुप्ता और उनके बेटे महेश गुप्ता को भी गिरफ्तार कर लिया. इस तरह मामले में आरोपियों की संख्या तीन हो गई.


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पुलिस के मुताबिक, संपत्ति उर्मिला गुप्ता के नाम बताई गई है. वहीं इमारत के प्रबंधन और संचालन में हरिराम गुप्ता और महेश गुप्ता की भूमिका की भी जांच की जा रही है.

7 सितंबर देर रात: तीनों आरोपियों की कोर्ट में पेशी

गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया. कोर्ट ने हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. वहीं, महेश गुप्ता को दो दिन की पुलिस कस्टडी दी गई. पुलिस महेश से इमारत के संचालन, प्रबंधन और हादसे से जुड़े दूसरे पहलुओं पर पूछताछ कर रही है.

8 सितंबर: हाई कोर्ट ने दिया साफ संदेश

8 सितंबर को मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने यह साफ संकेत दिया कि सिर्फ बिल्डिंग मालिकों पर कार्रवाई करके मामला खत्म नहीं होगा. अदालत ने संबंधित अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी की भी जांच पर जोर दिया.

कोर्ट ने MCD के अधिकार क्षेत्र में आने वाले हॉस्टलों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा और जांच के निर्देश दिए. यानी अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इमारत क्यों गिरी, बल्कि यह भी है कि ऐसी इमारतों को समय रहते असुरक्षित घोषित क्यों नहीं किया गया.

8 सितंबर: दिल्ली के PG का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में छात्रों के लिए चल रहे PG की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है. LG की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद PG इमारतों के स्ट्रक्चरल ऑडिट और नियमों की समीक्षा की बात सामने आई है.

इसका मकसद यह पता लगाना है कि राजधानी में छात्रों के रहने के लिए इस्तेमाल हो रही इमारतें सुरक्षा के लिहाज से कितनी सुरक्षित हैं और कहीं कोई बिल्डिंग नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रही.

10 सितंबर तक जांच की डेडलाइन

MCD ने इमारतों की जांच को लेकर अधिकारियों को समयसीमा भी दी है. कार्यकारी अभियंताओं को 10 सितंबर तक संबंधित इमारतों का निरीक्षण कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. सत्य निकेतन की घटना में फिलहाल 7 लोगों की मौत, 5 लोगों के घायल होने और तीन गिरफ्तारियों के बाद जांच आगे बढ़ रही है. अब देखना होगा कि जांच में हादसे की असली वजह क्या सामने आती है और प्रशासनिक स्तर पर किसकी जवाबदेही तय होती है.

यह हादसा एक बार फिर यह सवाल छोड़ गया है कि छात्रों और आम लोगों के रहने के लिए इस्तेमाल होने वाली इमारतों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ मालिकों की है या उन सरकारी एजेंसियों की भी, जिन्हें समय-समय पर इन इमारतों की जांच करनी होती है.

-भारत एक्सप्रेस



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