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शर्मीला पर दुनिया का ‘मोस्ट वांटेड’ जीव: शहडोल में तस्करों से बची जान; क्यों मिलते हैं सोने के भाव?

Pangolin Rescued in Shahdol: जबलपुर से शहडोल की तरफ बढ़ रही कार से दुनिया की सबसे कीमती और खतरे में पड़ी जान यानी पैंगोलिन को बरामद किया गया है. वन विभाग ने 4 तस्करों को भी गिरफ्तार किया है. आइये जानें इसके सोने के भाल क्यों मिलते हैं?

Pangolin Rescued in Shahdol

Pangolin Rescued in Shahdol: अनिल पाण्डेय/शहडोल: मध्यप्रदेश के शहडोल में वन विभाग ने वन्य जीवों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. दक्षिण वन मंडल की टीम ने एक कार से दुर्लभ प्रजाति के जिंदा पैंगोलिन को बरामद करते हुए 4 तस्करों को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई जबलपुर से शहडोल के रास्ते हो रही तस्करी की सूचना पर की गई.

हैरान करने वाली बात यह है कि पिछले 3 महीनों में वन विभाग ने महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में सक्रिय एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ (Pangolin Rescue Shahdol) किया है. अब तक अलग-अलग जिलों से 22 तस्कर गिरफ्तार किए जा चुके हैं, जिनके पास से 3 जिंदा पैंगोलिन, उनकी खाल और तेंदुए की चमड़ी भी जब्त की गई है.

क्यों होती है इसकी तस्करी?

इस खबर के साथ यह जानना जरूरी है कि जिस जीव को बचाया गया है, वह कितना खास है. इसे ‘सशलक’ (Scaly Anteater) भी कहा जाता है. पैंगोलिन दुनिया का सबसे अधिक तस्करी किया जाने वाला स्तनधारी जीव है. इसकी तस्करी हाथियों और गैंडों से भी ज्यादा होती है.

सोने के भाव बिकते हैं शल्क

पैंगोलिन के शरीर पर केराटिन (Keratin) के बने सख्त शल्क होते हैं. यह वही पदार्थ है जिससे हमारे नाखून और बाल बने होते हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार, खासकर चीन और वियतनाम में पारंपरिक दवाइयां बनाने के लिए इनकी भारी मांग है, जिसके कारण इनका अंधाधुंध शिकार होता है.

‘किसानों का मित्र’ है पैंगोलिन

पैंगोलिन को ‘किसानों का मित्र’ भी कहा जाता है क्योंकि यह एक साल में लगभग 7 करोड़ चींटियां और दीमक खा सकता है, जिससे फसलों की रक्षा होती है. जब इसे खतरा महसूस होता है, तो यह खुद को एक गेंद की तरह रोल कर लेता है. इसके शल्क इतने मजबूत होते हैं कि शेर या बाघ भी इसे आसानी से नुकसान नहीं पहुंचा पाते.

टाइगर जितना ही प्रोटेक्शन

भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत पैंगोलिन को अनुसूची-1 (Schedule I) में रखा गया है. इसका मतलब है कि इसे वही कानूनी सुरक्षा प्राप्त है जो बाघ (Tiger) को है. इसका शिकार करने पर 3 से 7 साल तक की सजा हो सकती है.

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वन विभाग की मुस्तैदी

डीएफओ (Shahdol Forest Department) श्रद्धा पेंदे ने बताया कि तस्करों का नेटवर्क गांव-गांव तक फैला हुआ था. ताजा कार्रवाई में पकड़े गए चारों आरोपियों के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है. विभाग का यह अभियान विलुप्तता की कगार पर खड़े इस ‘शर्मीले जीव’ को बचाने के लिए बेहद अहम है.



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