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Shaheed Diwas: पीएम मोदी ने शहीदों को किया नमन, बोले- भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव का निडर प्रयास हमें प्रेरित करता रहेगा

पीएम मोदी ने एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि आज हमारा राष्ट्र भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के सर्वोच्च बलिदान को याद करता है.

PM Modi

पीएम मोदी.

देश को अंग्रेजों की गुलामी से आजादी दिलाने वाले महानायकों के बलिदान को देश कभी नहीं भूल सकता. देश को मिली आजादी में अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले वीरों में शहीद भगत सिंह का योगदान सर्वोपरि है, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता है. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक, भारतीय युवाओं के आदर्श और साहस के प्रतीक भगत सिंह की आज पुण्यतिथि है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर एक पोस्ट शेयर कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की है.

पीएम मोदी ने दी श्रद्धांजलि

पीएम मोदी ने एक्स पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा है कि “आज हमारा राष्ट्र भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के सर्वोच्च बलिदान को याद करता है. स्वतंत्रता और न्याय के लिए उनका निडर प्रयास हम सभी को प्रेरित करता है.” आज ही के दिन 23 मार्च 1931 को उन्हें और उनके साथियों राजगुरु और सुखदेव को ब्रिटिश हुकूमत द्वारा फांसी दी गई थी, इस दिन को भारत शहीद दिवस के रूप में मनाता है.

पंजाब में हुआ था भगत सिंह का जन्म

भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर 1907 को पंजाब के लायलपुर में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है. बचपन से ही वह राष्ट्रीय आंदोलन से प्रभावित थे और अंग्रेजों के अन्यायपूर्ण शासन के खिलाफ उनके मन में गहरी नफरत थी. भगत सिंह मानते थे कि स्वतंत्रता केवल अहिंसा से नहीं, बल्कि क्रांतिकारी संघर्ष से हासिल की जा सकती है. उन्होंने यह साबित कर दिया कि अगर किसी देश को आजाद होना है तो उसे साहसिक कदम उठाने और संघर्ष करने से पीछे नहीं हटना चाहिए.

1929 में भगत सिंह की सबसे चर्चित घटना दिल्ली की सेंट्रल असेंबली में बम फेंकने की थी. इस घटना का उद्देश्य किसी को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि ब्रिटिश शासन का ध्यान आकर्षित करना था. इसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मुकदमा चलाया गया.

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कब दी गई थी फांसी?

भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को ब्रिटिश सरकार ने फांसी की सजा सुनाई. 23 मार्च 1931 को तीनों ने देश की आजादी के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी. उनके बलिदान ने भारत के युवाओं में नई क्रांतिकारी चेतना का संचार किया. उनके साहस और त्याग ने यह संदेश दिया कि स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए बलिदान और दृढ़ निश्चय आवश्यक हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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