अयोध्या के भव्य राम मंदिर में सामने आए कथित चंदा और चढ़ावा चोरी मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति और देश के धार्मिक कॉरिडोर्स में एक ऐसा भूचाल ला दिया है, जिसकी तीव्रता दिनों-दिन बढ़ती जा रही है. सीतापुर में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अनूप गुप्ता के आवास पर पहुंचे ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर ट्रस्ट और उसके पूर्व महासचिव चंपत राय को लेकर ऐसे तीखे बाण चलाए हैं, जिसने सत्तापक्ष से लेकर विपक्ष तक के होश उड़ा दिए हैं.
शंकराचार्य ने न केवल राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की कार्यशैली पर गहरे सवाल उठाए, बल्कि सीधे तौर पर पीएम मोदी और सपा मुखिया अखिलेश यादव का नाम लेकर एक बेहद चौंकाने वाली थ्योरी सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में तैरती व्हाट्सएप चैट के हवाले से दे दी है. आइए जानते हैं शंकराचार्य ने इस पूरे मामले में क्या बड़े और विस्फोटक दावे किए हैं.
पीएम को चाहते हैं चंपत राय- शंकराचार्य
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने मीडिया से मुखातिब होते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय पर वित्तीय अनियमितताओं और राजनीतिक साजिश का बेहद गंभीर आरोप लगाया. तीखा हमला बोलते हुए सीधे शब्दों में कहा कि चंपत राय खुद चोरी करके देश के प्रधानमंत्री को फंसाना चाह रहे हैं, यह बात अब जगजाहिर हो चुकी है.
सपा नेता टीनू यादव और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के बीच कथित तौर पर सामने आई व्हाट्सएप चैट के सवाल पर शंकराचार्य ने एक बड़ा कूटनीतिक इशारा किया. उन्होंने दावा किया कि टीनू यादव असल में चंपत राय का ही मुख्य आदमी है.
किसके आदमी हैं चंपत राय?
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने एक बड़ा यक्ष प्रश्न खड़ा करते हुए पूछा कि यदि ये सब अंदरूनी तौर पर एक-दूसरे से मिले हुए हैं, तो अब यह सबसे बड़ा सवाल है कि चंपत राय वास्तव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदमी हैं या फिर गुपचुप तरीके से अखिलेश यादव के एजेंडे पर काम कर रहे हैं?
FIR करो या ना करो ट्रस्ट भंग करो
राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे को लेकर देश भर के रामभक्तों में उपजे अविश्वास पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए शंकराचार्य ने तात्कालिक और कड़े एक्शन की मांग की है. उन्होंने कहा कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट को लेकर जो भी वित्तीय विवाद और साख का संकट चल रहा है, उस पर स्थिति पूरी तरह साफ होनी चाहिए. मंदिर निर्माण में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने का एक ही रास्ता है कि वर्तमान व्यवस्था को बदला जाए. उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि अब ट्रस्ट को तुरंत भंग करो, एफआईआर करो या ना करो.
बृजभूषण शरण सिंह की तारीफ
इसके साथ ही, शंकराचार्य ने भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की जमकर तारीफ की. उन्होंने कहा कि बृजभूषण शरण सिंह ने राम मंदिर आंदोलन और इससे जुड़े मुद्दों पर हमेशा अपना पक्ष बेहद मजबूती से रखा है. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन से इतना गहरा जुड़ा हुआ व्यक्ति आज मंदिर के इतने पास रहकर भी प्रभु रामलला के दर्शन करने नहीं गया, यह इस बात का प्रमाण है कि कहीं न कहीं उनके मन में लंबे समय से कोई गहरी पीड़ा और ठेस है जिसे समझा जाना चाहिए.
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राजनीतिक बिसात की नई जंग
शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के इन विस्फोटक बयानों के बाद अयोध्या का यह चंदा चोरी मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक भयंकर राजनीतिक और धार्मिक युद्ध का रूप ले लिया है. ट्रस्ट को भंग करने की मांग और चंपत राय द्वारा प्रधानमंत्री को फंसाने की कथित साजिश वाले दावों ने संघ परिवार और सरकार के सामने एक बड़ी अग्निपरीक्षा खड़ी कर दी है. अब देखना दिलचस्प होगा कि आगामी दिनों में जब जांच एजेंसियां अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंपती हैं, तो इन गंभीर आरोपों पर ट्रस्ट और केंद्र सरकार की तरफ से क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है.
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