वर्ष 2016 में शुरू की गई ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल देश में एंटरप्रेन्योरशिप, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी आधारित व्यवसाय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लाया गया था, जिसे शुक्रवार को 10 साल पूरे हो गए हैं. बीते एक दशक में ‘स्टार्टअप इंडिया’ ने न केवल नए कारोबारों को जन्म दिया, बल्कि भारत को दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र में शामिल कर दिया है. सरकारी नीतियों, आसान नियमों और वित्तीय सहयोग ने इस पूरे तंत्र को मजबूत आधार दिया है.
‘स्टार्टअप इंडिया’ की शुरुआत के समय देश में करीब 400 मान्यता प्राप्त स्टार्टअप थे, जो अब बढ़कर 2.09 लाख से अधिक हो चुके हैं. इन स्टार्टअप्स के जरिए लगभग 21 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिला है. औसतन हर स्टार्टअप करीब 11 नौकरियां पैदा कर रहा है. खास बात यह है कि 50 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 यानी छोटे और मध्यम शहरों से सामने आए हैं, जिससे इन क्षेत्रों में भी उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) को मजबूती मिली है.
पिछले दस वर्षों में सरकार ने स्टार्टअप्स को मजबूत करने के लिए कई अहम वित्तीय योजनाएं भी लागू कीं. साथ ही ‘स्टार्टअप इंडिया’ के तहत नियमों को सरल बनाने पर भी खास जोर दिया गया. अब तक 4,000 से ज्यादा नियमों को हटाया गया है और हजारों कानूनी प्रावधानों में बदलाव किए गए हैं.
रक्षा, अंतरिक्ष और एआई स्टार्टअप्स में तेजी से विस्तार
‘स्टार्टअप इंडिया’ के इन 10 वर्षों में भारत में यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स (जिनका मूल्यांकन 1 अरब डॉलर से ज्यादा होता है) की संख्या 4 से बढ़कर 120 से ज्यादा हो गई है. इन कंपनियों का कुल मूल्यांकन 350 अरब डॉलर से अधिक पहुंच चुका है. इस दौरान रक्षा तकनीक, अंतरिक्ष तकनीक, जैव-प्रौद्योगिकी, कृषि तकनीक और जनरेटिव एआई जैसे नए क्षेत्रों का तेजी से विस्तार हुआ है. आज देश में 1,000 से अधिक रक्षा स्टार्टअप्स, 380 से ज्यादा अंतरिक्ष स्टार्टअप्स और करीब 900 एआई आधारित स्टार्टअप्स सक्रिय रूप से देश के विकास में अपना योगदान दे रहे हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 2025 में 11 नए स्टार्टअप्स ने यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल किया. इनमें एआई डॉट टेक, नवी टेक्नोलॉजीज, रैपिडो, नेट्राडाइन, जंबोटेल, डार्विनबॉक्स, विवृति कैपिटल, वेरिटास फाइनेंस, मनीव्यू, जसपे और ड्रूल्स शामिल हैं. इनमें से अधिकतर स्टार्टअप वित्तीय तकनीक, सॉफ्टवेयर सेवा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाओं से जुड़े हुए हैं.
नई यूनिकॉर्न लिस्ट में एआई डॉट टेक सबसे ज्यादा चर्चा में रहा, जिसने केवल तीन वर्षों में 1.5 अरब डॉलर का मूल्यांकन हासिल कर यूनिकॉर्न क्लब में प्रवेश किया. यह इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कारोबार भारतीय अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं.
यूनिकॉर्न कंपनियों ने बनाई मजबूत पकड़
वहीं पहले से स्थापित यूनिकॉर्न कंपनियों ने भी अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी. आंकड़ों के अनुसार जेरोधा करीब 8.2 अरब डॉलर के मूल्यांकन के साथ टॉप पर रहा. रेजरपे और लेंसकार्ट करीब 7.5 अरब डॉलर के आसपास रहे, तो वहीं ग्रो करीब 7 अरब डॉलर के मूल्यांकन तक पहुंच गया. इसके अलावा जेप्टो, ऑफबिजनेस, इनमोबी, आयसर्टिस, ओयो (प्रिज्म) और मीशो जैसी कंपनियां भी भारत की टॉप यूनिकॉर्न लिस्ट में बनी हुई हैं. ये आंकड़े साफ दिखाते हैं कि भारतीय निवेशकों का भरोसा अभी भी वित्तीय तकनीक, ई-कॉमर्स, सॉफ्टवेयर सेवा और शिक्षा तकनीक जैसे क्षेत्रों पर कायम है.
कुल मिलाकर, ‘स्टार्टअप इंडिया’ के 10 साल भारत की उद्यमिता यात्रा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हुए हैं, जिसने इनोवेशन, रोजगार और निवेश के नए रास्ते खोले हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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