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भारत बना पृथ्वी का सबसे गर्म हिस्सा!…वैज्ञानिकों ने दी ‘गॉडजिला अल-नीनो’ की चेतावनी; क्या 2026 में बिना मानसून के तरसेगा देश?

World Meteorological Organization ने 2026 में ‘Super El Niño’ की चेतावनी दी है, जिससे भारत में भीषण गर्मी और कमजोर मानसून का खतरा है. El Nino के असर से 100 में 95 सबसे गर्म शहर भारत में दर्ज हुए हैं..

Super El Nino 2026 India Heatwave: दुनिया के नक्शे पर भारत का हिस्सा इन दिनों आग के गोले की तरह धधक रहा है. मौसम के ‘हीट मैप’ में भारत का लाल होना महज एक ग्राफिक्स नहीं, बल्कि उस खौफनाक हकीकत का संकेत है जिसने वैज्ञानिकों की नींद उड़ा दी है. दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों की सूची में से 95 अकेले भारत में हैं.

उत्तर-पूर्वी भारत में अप्रैल के महीने में ही पारा 43 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच झूल रहा है. मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी (India Heatwave Alert) दी है कि साल 2026 एक ‘सुपर अल-नीनो’ (Godzilla El-Nino) का गवाह बनने वाला है, जो इस सदी की सबसे भीषण तबाही ला सकता है.

क्या है ‘सुपर अल-नीनो’ और क्यों है खतरनाक?

अल-नीनो एक ऐसी जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से कहीं ज्यादा गर्म हो जाता है. लेकिन 2026 में आने वाले अल-नीनो को वैज्ञानिक ‘सुपर’ या ‘गॉडजिला’ अल-नीनो कह रहे हैं क्योंकि समुद्र के तापमान में वैसी बढ़ोतरी देखी जा रही है जो इस सदी में पहले कभी नहीं हुई. ब्रिटेन के मौसम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव इतनी तेजी से हो रहा है कि यह पूरी पृथ्वी के तापमान को रिकॉर्ड स्तर पर ले जाएगा.

भारत पर दोहरी मार की चेतावनी(India Heatwave Alert)

अल-नीनो का सबसे सीधा और घातक असर भारत के मानसून पर पड़ता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक:

कमजोर मानसून: अल-नीनो की वजह से दक्षिण एशिया, खासकर भारत में मानसून की बारिश अनियमित हो जाती है, जिससे सूखे जैसे हालात पैदा होते हैं.

गर्मी का टॉर्चर: अल-नीनो और मानव-निर्मित जलवायु परिवर्तन मिलकर देश के उत्तर और पूर्वी हिस्सों में लू (Heatwave) के प्रकोप को कई गुना बढ़ा देंगे.

असर: खेती-किसानी पर इसका बुरा असर पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में खाद्य संकट और महंगाई बढ़ने का खतरा है.

मई से जुलाई के बीच शुरू होगा असली खेल

विश्व मौसम संगठन (WMO) ने अप्रैल 2026 में जारी अपनी ताजा रिपोर्ट (India Heatwave Alert) में कहा है कि मई से जुलाई के बीच अल-नीनो पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा. हालांकि अभी समुद्र की सतह का तापमान औसत दिख रहा है, लेकिन समुद्र के अंदरूनी हिस्से का पानी पहले ही बहुत गर्म हो चुका है. यह इस बात का सबूत है कि आने वाले महीने केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया और अफ्रीका के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण होंगे.

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दुनिया भर में मौसम का ‘डिजास्टर’ मोड

सुपर अल-नीनो की वजह से केवल गर्मी ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि दुनिया भर में मौसम का संतुलन बिगड़ जाएगा. जहाँ ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण एशिया सूखे की मार झेलेंगे, वहीं दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों और पूर्वी अफ्रीका में भारी बारिश और विनाशकारी बाढ़ आने की संभावना है. वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में आने वाले तूफानों की संख्या भी बढ़ सकती है, जिससे तटीय इलाकों में रहने वाली आबादी पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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