देश की राजधानी दिल्ली में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता को बढ़ा दिया है. इसी बीच बिगड़ते हालातों और अस्पतालों की तैयारियों का जायजा लेने के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने एक हाई-लेवल समीक्षा बैठक की. इस बैठक में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह समेत केंद्र और राज्य सरकार के तमाम बड़े अधिकारी भी शामिल हुए.
घबराने की नहीं, सतर्कता की जरूरत
दरअसल, दिल्ली में इस साल अब तक स्वाइन फ्लू के 1,777 मामले दर्ज किए जा चुके हैं. अगर बीते सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो:
- 2025 में: महज 229 मामले सामने आए थे.
- 2024 में: यह आंकड़ा 3,151 तक पहुंच गया था.
- 2023 में: कुल 209 केस दर्ज हुए थे.
विशेषज्ञों का कहना है कि हर साल मौसम के बदलाव और मॉनसून के दौरान मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है. इसलिए घबराने के बजाय सावधानी बरतने की सलाह दी गई है.
वेंटिलेटर की समीक्षा
बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने अस्पतालों में बेड, वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट, जरूरी दवाओं और जांच सुविधाओं की उपलब्धता का बारीक जायजा लिया. उन्होंने निर्देश दिए कि अगर मरीजों की संख्या बढ़ती है, तो अस्पतालों में क्षमता तुरंत बढ़ाई जानी चाहिए और गंभीर मरीजों के लिए रेफरल सिस्टम को दुरुस्त रखा जाए. इसके साथ ही डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों से निपटने के लिए भी स्थानीय निकायों को सतर्क रहने को कहा गया है.
मास्क पहनें और लगवाएं वैक्सीन
एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने बताया कि मॉनसून में वायरल संक्रमण बढ़ना आम बात है. आमतौर पर मरीज 5 से 7 दिनों में बुखार, खांसी और जुकाम से उबर जाते हैं. हालांकि, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से पीड़ित मरीजों को विशेष देखभाल की जरूरत होती है. उन्होंने हाई-रिस्क ग्रुप के लोगों को हर साल इन्फ्लुएंजा वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है.
डीजीएचएस डॉ. लवनीश के कृष्णा ने भी साफ किया कि मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना और कमरों में सही वेंटिलेशन रखना ही इस संक्रमण से बचने का सबसे प्रभावी जरिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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