Bharat Express DD Free Dish

पंडवानी गायिका तीजन बाई का निधन, पीएम मोदी ने जताया शोक; बोले- ‘संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति’

प्रसिद्ध पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई का 70 वर्ष की आयु में रायपुर AIIMS में निधन हो गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए भारतीय लोक संस्कृति की अपूरणीय क्षति बताया…

Tejan Bai Demise: भारत की लोक कला और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक अमिट पहचान दिलाने वाली सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई का आज (5 जुलाई 2026) दुखद निधन हो गया है. इस बेहद दुखद खबर के सामने आते ही पूरे देश के कला जगत और खेल-सांस्कृतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित देश के तमाम बड़े राजनीतिक और सांस्कृतिक दिग्गजों ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि तीजन बाई का इस तरह दुनिया से चले जाना भारत के कला, संगीत और लोक संस्कृति जगत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई आने वाले कई दशकों तक नहीं की जा सकती है.

छत्तीसगढ़ की लोक कला को वैश्विक मंच पर दिलाई पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (Twitter) पर देश की इस महान विभूति के प्रति अपना गहरा आदर और शोक व्यक्त करते हुए एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की है. पीएम मोदी ने अपने संदेश में लिखा कि सुप्रसिद्ध पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन से उन्हें अत्यंत दुख हुआ है.

उन्होंने छत्तीसगढ़ की इस पारंपरिक लोक कला को अपनी भव्य, अद्वितीय और ओजस्वी प्रस्तुति से न सिर्फ देश के कोने-कोने में पहुंचाया बल्कि पूरी दुनिया भर में इसे एक विशिष्ट और सम्मानजनक पहचान दिलाई. प्रधानमंत्री ने आगे लिखा कि दुख और शोक की इस बेहद कठिन घड़ी में उनकी पूरी संवेदनाएं तीजन बाई के शोकाकुल परिजनों और देश-विदेश में फैले उनके करोड़ों प्रशंसकों के साथ हैं.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी जताया गहरा दुख

प्रधानमंत्री मोदी के साथ-साथ देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर अपनी गहरी वेदना व्यक्त की है. राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लोक कलाओं के क्षेत्र में अपनी जादुई और बुलंद गायकी से एक अमिट छाप छोड़ने वाली लोकप्रिय कलाकार तीजन बाई के निधन से उन्हें भारी दुख हुआ है.

छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला और मिट्टी की खुशबू को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने में उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रही है. रक्षा मंत्री ने भी संगीत जगत के लिए इसे एक बहुत बड़ा झटका बताते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना की और कहा कि उनकी अनूठी कलात्मक विरासत पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी.

ये भी पढ़ें: AIADMK को बड़ा झटका… टूट रही पार्टी? कई पूर्व मंत्री और विधायक विजय की TVK में होंगे शामिल

रायपुर AIIMS में ली अंतिम सांस

पंडवानी कला की महानायक तीजन बाई पिछले कुछ समय से गंभीर रूप से बीमार चल रही थीं और उन्होंने 70 वर्ष की उम्र में रायपुर के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में अपनी अंतिम सांस ली. तीजन बाई का जन्म साल 1956 में छत्तीसगढ़ के भिलाई के पास स्थित गनियारी गांव में एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था. उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोककला ‘पंडवानी’ को एक नया जीवन दिया, जिसमें महाभारत की वीरगाथाओं और कहानियों को अद्भुत गायन व जीवंत अभिनय के जरिए मंच पर प्रस्तुत किया जाता है.

देश और संस्कृति के प्रति उनके इसी बेमिसाल योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने साल 1988 में उन्हें पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और साल 2019 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘पध विभूषण’ से नवाजा था. तंबूरे को हाथ में लेकर जब वह मंच पर हुंकार भरती थीं, तो दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते थे, और आज उस बुलंद आवाज का शांत हो जाना हर कला प्रेमी की आंखें नम कर गया है.

-भारत एक्सप्रेस

 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read