बिहार में कानून-व्यवस्था और सरकारी अस्पतालों की स्थिति को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है. विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने राज्य में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में आम लोगों की सुरक्षा और मरीजों को बेहतर इलाज देने के मामले में सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही है.
तेजस्वी यादव ने आईएएनएस से बातचीत में सीतामढ़ी में जिला परिषद प्रतिनिधि की हत्या का मुद्दा उठाया. उनका कहना था कि राज्य में अपराध की घटनाएं लगातार चिंता बढ़ा रही हैं. उनके मुताबिक, बिहार में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो जब हत्या, अपहरण, रंगदारी या दुष्कर्म जैसी घटनाओं की खबर सामने ना आए. उन्होंने पुलिस से जुड़े अपराधों का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि स्थिति लगातार खराब होती जा रही है.
‘अपराधियों में कानून का डर नहीं’
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराधियों के मन में कानून का डर खत्म होता जा रहा है. उन्होंने सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि अपराधियों के खिलाफ जिस तरह की सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, वह जमीन पर दिखाई नहीं देती. विपक्ष के नेता ने कहा कि जब किसी परिवार के साथ बड़ी आपराधिक घटना होती है तो सरकार के शीर्ष नेताओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे पीड़ित परिवार के बीच पहुंचें और उनकी परेशानी समझें.
उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि केवल बयान जारी करने से हालात नहीं बदलेंगे. सरकार को घटनाओं के बाद मौके पर पहुंचकर कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे.
अस्पताल में इलाज को लेकर भी सवाल
तेजस्वी यादव ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा. उन्होंने जहानाबाद के एक अस्पताल से जुड़े उस मामले का हवाला दिया, जिसमें पैर टूटने के बाद एक मरीज को कथित तौर पर सामान्य प्लास्टर के बजाय कार्डबोर्ड पैड लगा दिए जाने की बात सामने आई है.
इस घटना को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया. तेजस्वी का कहना था कि अगर किसी सरकारी अस्पताल में मरीज को पैर टूटने जैसी सामान्य चोट के लिए भी जरूरी चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है, तो यह स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करता है.
उन्होंने तंज करते हुए कहा कि हालात ऐसे नजर आ रहे हैं जैसे सरकार के पास मरीज के पैर पर प्लास्टर चढ़ाने तक के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं. साथ ही उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की जांच होनी चाहिए और यह पता लगाया जाना चाहिए कि अस्पताल में ऐसी स्थिति आखिर क्यों बनी.
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-भारत एक्सप्रेस
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