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Delhi Metro से चोर चुरा ले जा रहे केबल….पिंक लाइन पर सबसे ज्यादा 15 बार हो गई चोरी

मई 2024 से अब तक मेट्रो नेटवर्क से 7.7 किलोमीटर इलेक्ट्रिक केबल चोरी हो चुकी है. ये केबल मेट्रो स्टेशनों, लाइटिंग, एस्केलेटर, एयर-कंडीशनिंग और अन्य नॉन-ट्रैक्शन लोड को बिजली देती हैं.

दिल्ली मेट्रो नेटवर्क से पिछले सात महीनों में ही 12 किलोमीटर से अधिक ट्रैक्शन केबल चोरी हो चुकी है, जिसमें पिंक लाइन पर 15 बार और रेड लाइन से 8 बार से अधिक चोरी का घटना हुई है. चोरी की इन घटनाओं ने हाल के महीनों में मेट्रो यात्रियों के लिए एक बड़ी असुविधा खड़ी की है, जिससे मरम्मत में लगने वाले समय के कारण ऑपरेशन में देरी और रुकावट पैदा हुई है. ट्रैक्शन केबल हाई-वोल्टेज केबल हैं जो ट्रेनों को बिजली की आपूर्ति करते हैं.

12.1 किलोमीटर केबल में से अधिकांश 7.4 किलोमीटर की चोरी पिंक लाइन (मजलिस पार्क से मौजपुर) से हुई. इस तरह की सबसे बड़ी चोरी पिछले साल अक्टूबर में हुई थी, जब पिंक लाइन पर लगभग 1.5 किलोमीटर तांबे की ट्रैक्शन केबल चोरी हो गई थी. मेट्रो सेवाओं में व्यवधान की सबसे हालिया घटना 13 मार्च को हुई थी, जब सीलमपुर और वेलकम मेट्रो स्टेशनों के बीच केबल चोरी होने के कारण पूरी रेड लाइन पर तीन घंटे से अधिक समय तक मेट्रो सर्विस में रुकावट पैदा हो गई थी.

तब मेट्रो प्रवक्ता ने कहा था कि “केबलों की चोरी से सिग्नलिंग सिस्टम बाधित हुआ और प्रभावित सेक्शन में ट्रेनों को 25 किलोमीटर प्रति घंटे की सीमित गति से चलाया गया. इससे पूरी रेड लाइन पर व्यापक असर पड़ा, जिसके परिणामस्वरूप आज इस अवधि के दौरान एक छोर से दूसरे छोर तक की यात्रा में देरी हुई.”

जून 2024 से अब तक चोरी के 89 मामले सामने आए

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) मेट्रो नेटवर्क में हुई चोरी का पता चलने पर परिचालन घंटों में आपातकालीन उपाय कर केबलों को बदलता है. हालांकि, यह जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण है क्योंकि हर 3-5 मिनट में ट्रेनें चलती हैं. कभी-कभी, अगर ऐसा नहीं होता है तो आम तौर पर परिचालन घंटों के खत्म होने के बाद रात में केबलों को बदलने का का काम किया जाता है.

मेट्रो नेटवर्क से सिर्फ ट्रैक्शन केबल की ही चोरी नहीं हुई है, बल्कि चोर बिजली और सिग्नलिंग केबलों को भी निशाना बनाते हैं. पिछले 10 महीनों में 89 ऐसी चोरी की सूचना मिली है. मेट्रो प्रवक्ता के अनुसार, हाल के महीनों में ऐसी घटनाओं का बार-बार होना चिंता का विषय है. उन्होंने कहा, “जून 2024 से अब तक मेट्रो नेटवर्क के विभिन्न कॉरिडोर से केबल चोरी के 89 मामले सामने आए हैं. इन चोरी में ट्रैक्शन केबल के 35 मामले, सिग्नलिंग केबल के 32 मामले और इलेक्ट्रिकल केबल के 22 मामले शामिल हैं.”

तीन महीनों में 2.1 किमी इलेक्ट्रिक केबल चोरी

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2024 से अब तक डीएमआरसी नेटवर्क से 7.7 किलोमीटर इलेक्ट्रिक केबल चोरी हो चुकी है. ये केबल मेट्रो स्टेशनों, लाइटिंग, एस्केलेटर, एयर-कंडीशनिंग और अन्य नॉन-ट्रैक्शन लोड को बिजली देती हैं. इलेक्ट्रिक केबल चोरी की भी सबसे ज्यादा घटनाएं पिंक लाइन पर हुईं. यहां 6.8 किलोमीटर केबल की चोरी हुई है.

इस साल सिर्फ तीन महीनों में 2.1 किलोमीटर इलेक्ट्रिक केबल चोरी हो गई. सिग्नलिंग केबल की 32 चोरी की घटनाओं में से रेड लाइन सबसे अधिक प्रभावित रही, जहां 12 चोरी की घटना हुई. ये वे केबल हैं जो ट्रेन कंट्रोल, सिग्नल और सिस्टम के बीच संचार के लिए डेटा संचारित करती हैं. पुलिस के अनुसार, मेट्रो ट्रैक के बेस पर चलने वाले सिग्नलिंग केबल उच्च गुणवत्ता वाले तांबे से बने होते हैं और ग्रे मार्केट में ऊंचे दामों पर बिकते हैं. चोरी की गई इन केबलों को फिर कबाड़ी और दूसरे कारोबारियों को बेच दिया जाता है.

अधिकारी ने क्या बताया ?

डीएमआरसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पहले कहा था कि तांबे से बने इन्सुलेटेड तार के एक मीटर की कीमत कम से कम 5,000 से 10,000 रुपये के बीच हो सकती है. अधिकारी ने कहा कि ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) केबल को चुराना असंभव है क्योंकि उनमें बहुत अधिक बिजली चार्ज होती है, लेकिन ट्रैक के बेस पर चलने वाली केबल की चोरी आसान होती है और इससे सिग्नलिंग संबंधी समस्याएं होती हैं, जिसके कारण ट्रेनों को मैनुअल मोड पर और लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटे की कम गति से चलाना पड़ता है.

वहीं सामान्य तौर पर यह 35-40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती है, जिससे सेवाओं में देरी होती है. ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए डीएमआरसी चोरी की आशंका वाले इलाकों में केबलों पर सीमेंट लगाने, एंटी-थेफ्ट क्लैंप लगाने, कंसर्टिना कॉइल का इस्तेमाल करने और केबल ट्रे को ढकने जैसे कदम उठा रहा है.


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-भारत एक्सप्रेस



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