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बंगाल में बड़ा खेला! TMC के बागी सांसदों का ठिकाना बनी NCPI रातों-रात कैसे बन गई ‘बहुजन’?

20 बागी सांसदों की नई चाल से बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है. अचानक NCPI के नाम के आगे ‘बहुजन’ जुड़ने से सियासी गलियारों में सवालों की बौछार शुरू हो गई है.

NCPI has become 'Bahujan'

NCPI रातों-रात कैसे बन गई 'बहुजन'?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव हारने के बाद तृणमूल कांग्रेस में बड़ी दरार पड़ गई. 20 सांसदों ने काकोली घोष दस्तीदार की अगुवाई में अलग रास्ता चुन लिया और खुद को NCPI से जोड़ने का ऐलान कर दिया. हालांकि संसद में इस नई पार्टी को अब तक मान्यता नहीं मिली है, जिससे बागी सांसदों के नाम के आगे अभी भी तृणमूल कांग्रेस ही लिखा जा रहा है.

बहुजन NCPI का न्योता

नए गुट ने दलितों, मुसलमानों, आदिवासियों और OBC समुदाय को जोड़ने का आह्वान किया है. सोशल मीडिया पोस्ट में कहा गया कि पार्टी के सभी पदों पर इन वर्गों को 25% प्रतिनिधित्व दिया जाएगा. इसके लिए संपर्क नंबर भी साझा किया गया है.

अंदरूनी असहमति की चर्चा

काकोली घोष दस्तीदार के बेटे ने सफाई देते हुए कहा कि यह कोई अलग पार्टी नहीं बल्कि एक विंग या ट्रस्ट है जो समाज के कमजोर वर्गों के लिए काम करेगा. इसमें कंप्यूटर देने से लेकर सामाजिक सेवा तक की पहल शामिल है. बहुजन NCPI नाम से पोस्ट होने के बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या पार्टी के भीतर असहमति बढ़ रही है.

काकोली घोष दस्तीदार ने क्या कहा?

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पोस्ट उनके सोशल मीडिया सेल से किया गया था. 20 सांसद पहले से ही इस नए मंच पर काम कर रहे हैं और आगे भी जारी रखेंगे. उनका कहना है कि नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया खासकर दलितों, महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए काम करती रहेगी.

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अटकलों का दौर

ये सभी सांसद तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा पहुंचे थे लेकिन अब NCPI से जुड़ गए हैं. बावजूद इसके पार्टी जनता पर कोई खास असर नहीं डाल पाई है और संसद में पहचान भी नहीं मिली है. इसी वजह से यह अटकलें तेज हो गई हैं कि क्या NCPI अब बहुजन NCPI में बदलने जा रही है?

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-भारत एक्सप्रेस



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