उत्तर भारत के मौसम ने एक बार फिर करवट ले ली है. आज यानी 22 जनवरी से अगले कुछ दिन उत्तर भारत के लिए काफी अहम रहने वाले हैं. एक तरफ जहां पहाड़ों पर बर्फबारी का दौर शुरू हो रहा है, वहीं मैदानी इलाकों में बारिश और तेज हवाएं ठिठुरन बढ़ाने को तैयार हैं.
मौसम विभाग (IMD) के अनुसार, एक नया ‘पश्चिमी विक्षोभ’ (Western Disturbance) उत्तर भारत में दस्तक दे चुका है. इसे अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भरपूर नमी मिल रही है, जिसका सीधा मतलब है कि आने वाले 24 से 48 घंटों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल जाएगा.
पहाड़ों पर हलचल
कश्मीर से लेकर हिमाचल और उत्तराखंड तक, पहाड़ों पर आज से हलचल बढ़ने वाली है. जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में आज भारी बर्फबारी और बारिश की संभावना है. मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इन इलाकों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं और बिजली गिरने की भी आशंका है.
उत्तराखंड की बात करें तो उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में आज हल्की बर्फबारी और बारिश हो सकती है. जो पर्यटक बर्फ देखने के लिए पहाड़ों का रुख कर रहे हैं, उनके लिए यह अच्छी खबर हो सकती है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह मुश्किलें भी बढ़ा सकता है.
क्या है NCR और मैदानी इलाकों का हाल?
देश की राजधानी दिल्ली में आज सुबह की शुरुआत हल्की धुंध के साथ हुई, लेकिन दिन चढ़ने के साथ धूप निकलने की उम्मीद है. दिल्ली में आज अधिकतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. हालांकि, दोपहर के बाद हवा की रफ्तार बढ़ेगी, जो शाम होते-होते ठंड का अहसास कराएगी.
पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के कुछ हिस्सों में सुबह के वक्त घना कोहरा छाये रहने का अनुमान है, जिससे सड़क पर चलने वालों को थोड़ी परेशानी हो सकती है. हालांकि, राहत की बात यह है कि अगले दो दिनों में न्यूनतम तापमान में 2 से 4 डिग्री की बढ़ोतरी होगी, जिससे रात की कड़ाके वाली ठंड से थोड़ी राहत मिल सकती है.
यूपी में बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी
यूपी के लोगों के लिए आने वाले दिन थोड़े चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं. लखनऊ, कानपुर और आसपास के इलाकों में कोहरा भले ही कम हो, लेकिन मौसम विभाग ने 22 से 27 जनवरी के बीच बारिश और तेज हवाओं का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आज से ही बूंदाबांदी शुरू हो सकती है, जबकि कुछ जिलों में ओलावृष्टि की भी संभावना जताई गई है. 30 से 35 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं फसलों के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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