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UGC नियमों और ‘घूसखोर पंडत’ विवाद पर गरजीं प्रियंका चतुर्वेदी, सरकार को संसद में घेरा, फिल्म के टाइटल को बताया शर्मनाक

UGC के नए नियमों और फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ विवाद पर शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने संसद में सरकार को घेरा. फिल्म के टाइटल को बताया शर्मनाक, मामला कोर्ट तक पहुंचा.

Ghuskhor Pandit Controversy Priyanka Chaturvedi

देश में यूजीसी (UGC) के नए नियमों को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. इस मुद्दे पर अब शिवसेना (UBT) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी (Priyanka Chaturvedi) ने बड़ा बयान दिया है. प्रियंका ने राज्यसभा में कहा कि कॉलेजों में सामाजिक न्याय के नाम पर ध्रुवीकरण किया जा रहा है. केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यूजीसी नियमों पर राजनीति कर चुप्पी साधे हुए है.

इसके साथ ही प्रियंका गांधी ने फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल की भी तीखी आलोचना की है. उन्होंने कहा कि समाज को धर्म के आधार पर बांटा गया और अब जाति के आधार पर विभाजन किया जा रहा है.

संसद में सरकार को घेरा

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा में कहा, “यूजीसी के नए नियम कॉलेजों में सामाजिक न्याय के नाम पर ध्रुवीकरण कर रहे हैं. मैं सुप्रीम कोर्ट का धन्यवाद करना चाहती हूं, जिसने इन नियमों पर रोक लगाई.” उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार में थोड़ी भी शर्म बची है तो इन गाइडलाइंस को वापस लेकर नई और संतुलित यूजीसी नीति लाई जानी चाहिए.

फिल्म के टाइटल को बताया शर्मनाक

शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने आगामी फिल्म घूसखोर पंडत के टाइटल की तीखी आलोचना की है. शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि देश में वर्तमान स्थिति को देखते हुए, जहां पहले धार्मिक आधार पर विभाजन हुआ और अब जाति के आधार पर हो रहा है. साथ ही यूजीसी दिशानिर्देशों में भी भेदभाव दिख रहा है, ऐसे में इस तरह का फिल्म टाइटल जारी करना उचित नहीं है. उन्होंने इसे शर्मनाक बताया और कहा कि यह उसी समूह के खिलाफ रिवर्स लेबलिंग है, जिस पर अक्सर भेदभाव का आरोप लगता है. प्रियंका चतुर्वेदी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सामग्री की जिम्मेदारी पर जोर दिया और कहा कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को अपनी सामग्री के लिए अधिक जवाबदेह होना चाहिए.

फिल्म विवाद पर निर्देशक की माफी, FIR दर्ज

फिल्म को लेकर उठे विवाद के बाद निर्देशक नीरज पांडे ने माफी मांगते हुए सभी प्रचार सामग्री हटा दी है. उन्होंने कहा कि यह फिल्म एक काल्पनिक पुलिस ड्रामा है, जिसमें ‘पंडत’ शब्द केवल एक काल्पनिक किरदार का उपनाम है और इसका किसी जाति, धर्म या समुदाय से कोई संबंध नहीं है. फिल्म में मनोज बाजपेयी एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी की भूमिका निभा रहे हैं. निर्देशक ने कहा कि यदि टाइटल से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो वे इसके लिए माफी मांगते हैं.

उधर, लखनऊ के हजरतगंज थाने में निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. शिकायत में टाइटल और संभावित कंटेंट से धार्मिक व जातिगत भावनाएं आहत होने और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका जताई गई है. ब्राह्मण समुदाय और कुछ संगठनों में नाराजगी है.


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हाईकोर्ट में याचिका

इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट में भी फिल्म की रिलीज और स्ट्रीमिंग पर रोक की मांग को लेकर याचिका दाखिल हुई है. याचिकाकर्ता का दावा है कि टाइटल और कंटेंट मानहानिकारक और आपत्तिजनक हैं. याचिका में कहा गया है कि पंडत शब्द को भ्रष्टाचार से जोड़ना ब्राह्मण समुदाय की गरिमा को ठेस पहुंचाता है. मामला फिलहाल कानूनी प्रक्रिया में है.

-भारत एक्सप्रेस



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