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ऐसी तस्वीर नहीं देखी होगी! उज्जैन में सैयदना साहब के आदेश पर क्यों गिराया गया 200 साल पुरानी मस्जिद का हिस्सा?

Husami Mosque Ujjain Update: सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच उज्जैन से विकास और आपसी भाईचारे की एक बेहद अनूठी तस्वीर सामने आई है. 200 साल पुरानी हुसामी मस्जिद के हिस्से को हटाने के लिए किसी बुलडोजर की नहीं, बल्कि खुद बोहरा समाज की सहमती से तोड़ा गया.

Members of the Bohra community voluntarily removing a part of the historic Husami Mosque in Ujjain to aid road widening work for Singhasth 2028

उज्जैन में आपसी सहमति से मस्जिद के हिस्से हटाया गया

Husami Mosque Ujjain Update: महाकाव्य नगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं. शहर की सड़कों को चौड़ा करने और यातायात को सुगम बनाने के लिए प्रशासन लगातार काम कर रहा है. इसी बीच, उज्जैन से शहर के विकास और आपसी सद्भाव की एक ऐसी खूबसूरत तस्वीर सामने आई है, जिसकी तारीफ हर तरफ हो रही है.

सड़क चौड़ीकरण के रास्ते में आ रही करीब 200 साल पुरानी हुसामी मस्जिद के एक हिस्से को बोहरा समाज के लोगों ने खुद आगे आकर और आपसी सहमति से हटाना शुरू कर दिया है.

खुद हथौड़ा लेकर पहुंचे समाज के लोग (Bohra community demolishes mosque Ujjain)

शुक्रवार शाम गोपाल मंदिर के सामने छत्री चौक इलाके में उस वक्त एक अनूठा नजारा देखने को मिला, जब बोहरा समाज के लोग खुद हथौड़े और औजार लेकर मस्जिद के निर्धारित हिस्से को तोड़ने में जुट गए. कंठाल से गोपाल मंदिर तक सड़क को चौड़ा किया जा रहा है, जिसके दायरे में हुसामी मस्जिद का करीब 8 से 8.5 फीट हिस्सा आ रहा था. नगर निगम के भवन अधिकारी राजकुमार राठौर के मुताबिक, मस्जिद प्रबंधन को पहले नोटिस दिया गया था, जिसके बाद समाज ने पूरी रजामंदी से इस काम को खुद अंजाम देने का फैसला किया.

‘सरकार के विकास कार्यों में सहयोग है सर्वोपरि’ (Ujjain Singhasth 2028 road widening)

बोहरा समाज के प्रतिनिधि अब्बास सियावाला ने बताया कि यह मस्जिद लगभग 200 साल पुरानी है. उन्होंने कहा कि उनके धार्मिक गुरु सैयदना साहब का स्पष्ट आदेश है कि देश और सरकार विकास कार्य के लिए जो भी फैसले लें, उसमें पूरा सहयोग किया जाना चाहिए. इसी प्रेरणा के तहत समाज के लोगों ने बिना किसी विरोध के खुद आगे बढ़कर निर्माण हटाने की पहल की है.

प्रशासन के अनुसार, इस मार्ग पर आने वाली अन्य बाधाओं और दूसरी मस्जिद को लेकर भी नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. सिंहस्थ के महापर्व से पहले उज्जैन के विकास में यह सहयोग देश भर के लिए एक मिसाल बन गया है.



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