हिंदी साहित्य में अपनी करुणा, वेदना और आत्मशक्ति से अमर हो जाने वाली महान कवयित्री महादेवी वर्मा की पुण्यतिथि पर आज पूरा देश उन्हें नमन कर रहा है. केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए महादेवी वर्मा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है. गृह मंत्री ने कहा कि छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में एकमात्र महिला के रूप में उन्होंने हिंदी साहित्य को एक नई दिशा दी.
‘छायावाद के चार स्तंभों में इकलौती महिला शक्ति’
गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संदेश में लिखा, “छायावाद के चार प्रमुख स्तंभों में एकमात्र महिला के रूप में महादेवी वर्मा जी ने हिंदी साहित्य को नारी की वेदना, करुणा और आत्मशक्ति का स्वर दिया.”
उन्होंने आगे कहा कि प्रयाग महिला विद्यापीठ की प्राचार्या के रूप में महादेवी जी ने महिला शिक्षा को एक नई दिशा दी और अपने लेखन के जरिए समाज में नारी स्वतंत्रता व आत्मसम्मान की अलख जगाई. पद्य से लेकर गद्य तक, उनकी हर रचना मानवीय संवेदना की अद्वितीय मिसाल है.
साहित्य और शिक्षा को महादेवी वर्मा का अमूल्य योगदान
26 मार्च 1907 को जन्मीं महादेवी वर्मा छायावाद युग (Chhayavad) की चार प्रमुख मणियों जयशंकर प्रसाद, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत और महादेवी वर्मा में से एक थीं. उन्हें उनकी गहरी भावुकता और आध्यात्मिक काव्य के कारण ‘आधुनिक मीरा’ के रूप में जाना जाता है. उनकी प्रमुख रचनाओं में ‘नीहार’, ‘रश्मि’, ‘नीरजा’, ‘सांध्यगीत’ और गद्य में ‘स्मृति की रेखाएं’ व ‘पथ के साथी’ जैसी कृतियां शामिल हैं.
साहित्य में उनके अद्वितीय योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था. 11 सितंबर 1987 को उनका निधन हो गया था, लेकिन उनके विचार आज भी साहित्य प्रेमियों का मार्गदर्शन कर रहे हैं.
आज देशभर में साहित्यिक संस्थाओं, विद्यालयों और पाठकों द्वारा महादेवी वर्मा को याद किया जा रहा है. गृह मंत्री अमित शाह का यह संदेश नई पीढ़ी को महादेवी जी के आदर्शों, उनकी सादगी और नारी सशक्तिकरण के उनके महान संघर्ष से जोड़ने का एक बेहद खूबसूरत प्रयास है. उनका जीवन और साहित्य हमेशा भारत की सांस्कृतिक व बौद्धिक चेतना को रोशन करता रहेगा.
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.


