संसद के विशेष सत्र में पेश किए गए तीन ऐतिहासिक विधेयकों में से केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (Union Territories Laws Amendment Bill 2026) अत्यंत महत्वपूर्ण है. यह विधेयक न केवल केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) के चुनावी ढांचे को बदलने जा रहा है, बल्कि उन्हें देश के नए संवैधानिक सुधारों (महिला आरक्षण और परिसीमन) के सांचे में फिट करने की तैयारी है.
यहां इस बिल (UT Laws Amendment Bill 2026)से जुड़े हर बड़े बदलाव और प्रभाव को सवाल-जवाब के आसान फॉर्मेट में समझते हैं:
1. यूनियन टेरिटरी लॉ बिल का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और पुडुचेरी जैसे विधानसभा वाले केंद्र शासित प्रदेशों के कानूनों को संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026 के अनुरूप बनाना है. सरल शब्दों में, यह सुनिश्चित करना है कि देश के बाकी राज्यों की तरह इन UTs में भी महिलाओं को 33% आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) के नए नियम एक समान रूप से लागू हों.
2. पुडुचेरी विधानसभा में क्या बड़ा बदलाव होने जा रहा है?
पुडुचेरी के लिए इस बिल में एक विशेष और बड़ा प्रस्ताव है:
नामांकित सदस्यों (Nominated Members) में बढ़ोतरी: पुडुचेरी विधानसभा में नामांकित सदस्यों की संख्या को बढ़ाकर 5 करने का प्रस्ताव है.
महिला प्रतिनिधित्व: इन 5 नामांकित सदस्यों में से 2 महिलाओं का होना अनिवार्य होगा. यह कदम स्थानीय प्रशासन में महिलाओं की भागीदारी को सीधे तौर पर बढ़ाने के लिए उठाया गया है.
3. ‘जनसंख्या’ की परिभाषा में क्या बदलाव किया गया है?
नए विधेयक के तहत, सीटों के आरक्षण और परिसीमन के लिए ‘जनसंख्या’ की परिभाषा को नए सिरे से परिभाषित किया गया है. अब यह 2011 की जनगणना (या सरकार द्वारा निर्धारित ताजा आंकड़ों) के आधार पर तय होगी. इसका सीधा असर सीटों के पुनर्निर्धारण पर पड़ेगा, जिससे दिल्ली और जम्मू-कश्मीर जैसे क्षेत्रों में चुनावी क्षेत्रों का भूगोल बदल सकता है.
4. जम्मू-कश्मीर और दिल्ली पर इसका क्या असर होगा?
महिला आरक्षण: नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत दिल्ली और जम्मू-कश्मीर की विधानसभाओं में भी 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी.
सीटों का पुनर्गठन: परिसीमन विधेयक 2026 के साथ जुड़कर यह कानून इन दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में विधानसभा सीटों की संख्या और उनकी सीमाओं को जनसंख्या के नए अनुपात में तय करने का अधिकार देगा.
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5. यह विधेयक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ से कैसे जुड़ा है?
2023 में पारित महिला आरक्षण कानून को जमीन पर उतारने के लिए यह एक तकनीकी सेतु (Bridge) है. चूंकि दिल्ली, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर के अपने अलग ‘गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज एक्ट’ हैं, इसलिए उनमें संशोधन किए बिना वहां महिला आरक्षण लागू करना कानूनी रूप से पेचीदा होता. यह बिल (UT Laws Amendment Bill 2026) उसी कानूनी अड़चन को खत्म करता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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