UP Assembly Election 2027: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 अभी भले ही काफी अभी दूर हों लेकिन राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो चुकी है. सत्ता पक्ष से लेकर विपक्ष तक सभी दल अपनी रणनीति बनाने में जुट गए हैं. दिल्ली से लेकर लखनऊ तक एक चर्चा जोर पकड़ रही है कि क्या अखिलेश यादव की साइकिल पर अरविंद केजरीवाल सवार होंगे? अगर ऐसा हुआ तो कांग्रेस को किनारे कर दिया जाएगा या फिर अखिलेश दोनों को साथ लेकर चलेंगे. यही बड़ा सवाल है.
सपा की रणनीति और तैयारी
लोकसभा चुनाव 2025 में मिली सफलता ने समाजवादी पार्टी को नई ऊर्जा दी है. अखिलेश यादव इस बार सत्ता में वापसी के लिए हर स्तर पर तैयारी कर रहे हैं. उन्होंने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करना शुरू कर दिया है. इस बार सपा केवल यादव-मुस्लिम समीकरण पर निर्भर नहीं रहना चाहती बल्कि PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक कार्ड को आक्रामक तरीके से खेलने की योजना बना रही है. राम मंदिर चंदा घोटाले से लेकर अलग-अलग मुद्दों पर अखिलेश यादव लगातार बीजेपी पर हमलावर हैं.
यूपी में AAP की एंट्री
राजनीतिक सूत्रों की माने तो आम आदमी पार्टी भी यूपी में अपनी मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है. हालांकि कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन पार्टी की गतिविधियां इस ओर इशारा करती हैं. दिल्ली और पंजाब मॉडल को लेकर AAP यूपी में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन कर सकती है. मुफ्त बिजली-पानी और शिक्षा के मॉडल को सपा के मंच से पेश करने की योजना है.
संजय सिंह की सक्रियता
पिछले एक साल से AAP के यूपी प्रभारी संजय सिंह लगातार कार्यक्रम कर रहे हैं. वह यूपी में पार्टी के लिए जमीन तैयार करने में जुटे हैं. जानकारों की माने तो AAP शहरी मतदाताओं पर खास ध्यान दे रही है. अगर सपा और AAP का गठबंधन होता है तो यह नया समीकरण बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है.
कांग्रेस की मुश्किलें
सपा और AAP की नजदीकियों के बीच कांग्रेस की स्थिति असमंजस में है. लोकसभा चुनाव 2024 में सपा और कांग्रेस ने मिलकर अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन विधानसभा चुनाव 2027 में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान साफ दिख रही है. कांग्रेस बराबर सम्मान और हिस्सेदारी की मांग कर रही है जबकि सपा खुद को बड़ा भाई की भूमिका में देख रही है.
सीट सेयरिंग पर विवाद
कांग्रेस नेताओं के बयानों से साफ है कि वे गठबंधन में बराबर हिस्सेदारी चाहते हैं. वहीं सपा का मानना है कि जमीनी हकीकत कांग्रेस के पक्ष में नहीं है. अगर अखिलेश ने कांग्रेस को दरकिनार कर AAP जैसी पार्टियों को प्राथमिकता दी तो कांग्रेस के लिए यूपी में अपनी जमीन बचाना मुश्किल हो सकता है.
बीजेपी की तैयारी
बीजेपी भी अपनी रणनीति पर काम कर रही है. नए चेहरों और सामाजिक समीकरणों के जरिए पार्टी यूपी में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है. विपक्षी एकता के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि क्या वे मिलकर बीजेपी को टक्ककर दे पाएंगे या सीट बंटवारे के विवाद से गठबंधन कमजोर हो जाएगा?
राम मंदिर मुद्दे पर विपक्षी एकता
राम मंदिर चंदा घोटाले पर सपा, AAP और कांग्रेस तीनों ही बीजेपी पर हमलावर है. अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल लगातार बयान दे रहे हैं. वहीं कांग्रेस भी इस मुद्दे को उठा रही है. हालांकि कांग्रेस को चिंता है कि AAP उसके वोट बैंक पर असर डाल सकती है.
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 एक बहुकोणीय मुकाबला बनने जा रहा है. सपा, AAP और कांग्रेस के बीच समीकरण अभी स्पष्ट नहीं हैं. बीजेपी अपनी रणनीति पर काम कर रही है. फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि उत्तर प्रदेश की राजनीति का ऊंट किस करवट बैठेगा लेकिन इतना तय है कि आने वाले महीनों में सियासी हलचल और तेज होगी. इसपर सस्पेंस के साथ मस्ल वाला हेडलाइन बनाकर दें.
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-भारत एक्सप्रेस
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