उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने सूबे में अपनी चुनावी मशीनरी को फुल स्पीड में दौड़ाना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में आगामी 30 और 31 अक्टूबर को राजधानी लखनऊ में बीजेपी की सबसे बड़ी और धमाकेदार प्रदेश कार्यसमिति की बैठक होने जा रही है, जिसमें देश के गृहमंत्री और चुनावी चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह सीधे मोर्चा संभालने आ रहे हैं. मिशन-2027 के मद्देनजर इस मेगा बैठक को लेकर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई है.
अमित शाह देंगे जीत का अचूक मंत्र
उत्तर प्रदेश की सियासत में ‘गेमचेंजर’ माने जाने वाले गृहमंत्री अमित शाह के इस दौरे को लेकर पार्टी के भीतर और बाहर हलचल तेज हो गई है. लखनऊ में होने वाली इस दो दिवसीय कार्यसमिति की बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सहित तमाम केंद्रीय व राज्य सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक और पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी हिस्सा लेंगे.
सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह इस बैठक के जरिए कार्यकर्ताओं को सिर्फ दिशा-निर्देश ही नहीं देंगे, बल्कि 2017 के उस ऐतिहासिक चुनावी फॉर्मूले को जमीन पर उतारने का ब्लूचिप्रिंट भी तैयार करेंगे जिसने कभी विपक्षियों की नींद उड़ा दी थी.
पुराने चुनावी फॉर्मूले की वापसी और बूथ स्तर पर चक्रव्यूह
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमित शाह नवंबर महीने में सूबे के सभी बूथ अध्यक्षों और शक्ति केंद्र संयोजकों के साथ सीधे संवाद करने का बड़ा प्लान बना रहे हैं. बीजेपी का पूरा फोकस एक बार फिर से पन्ना प्रमुखों और बूथ मैनेजमेंट को धार देने पर है. साल 2024 के लोकसभा चुनावों के नतीजों से सबक लेते हुए पार्टी इस बार किसी भी तरह की सुस्ती या लापरवाही के मूड में नहीं है. यही वजह है कि संगठन के शीर्ष स्तर से लेकर जमीन तक कसावट लाने के लिए खुद चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह मैदान में उतर रहे हैं.
भीतरखाने सुलग रही नाराजगी पर लगेगी लगाम
भले ही पार्टी मिशन-2027 के रथ पर सवार होकर आगे बढ़ रही हो, लेकिन संगठन के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. प्रदेश से लेकर क्षेत्रीय और जिला इकाइयों के गठन में हो रही देरी को लेकर केंद्रीय नेतृत्व पहले ही अपनी कड़ी नाराजगी जता चुका है. युवा मोर्चा और अल्पसंख्यक मोर्चे समेत कई अहम इकाइयों की घोषणाएं बाकी हैं, और कई जगहों पर टिकट व पदों को लेकर अंदरखाने विरोध के स्वर भी फूट रहे हैं. ऐसे में अमित शाह का यह दौरा डैमेज कंट्रोल करने और असंतुष्ट नेताओं को साधने के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है.
सत्ता के सेमीफइनल से पहले महामंथन
यूपी की सियासत में इस कार्यसमिति की बैठक को ‘सत्ता के सेमीफाइनल’ की सबसे बड़ी चाल के रूप में देखा जा रहा है. एक तरफ जहां विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने की रणनीति बना रहे हैं, वहीं बीजेपी कार्यसमिति के मंच से अपनी प्रशासनिक और संगठनात्मक ताकत का ऐसा प्रदर्शन करने जा रही है जिससे विरोधियों के खेमे में खलबली तय है. देखना यह होगा कि अमित शाह के इस दौरे के बाद बीजेपी की रुकी हुई संगठनात्मक रफ्तार को कितना पंख मिलता है और बागी तेवरों पर किस तरह लगाम लगती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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