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नहीं होगी यूरिया-खाद की कोई किल्लत! जून में 40% नीचे आए दाम, होर्मुज विवाद के बीच कैसे हुआ ये कमाल?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में मई के मुकाबले जून में यूरिया की कीमतों में करीब 40% की गिरावट दर्ज की गई है. सरकार के अनुसार, घरेलू उत्पादन बढ़ने और पर्याप्त स्टॉक होने से खरीफ सीजन में किसानों को खाद की कमी नहीं होगी.

पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भारत सरकार और देश के करोड़ों किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर (Urea Price Fall India) सामने आई है. दरअसल अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यूरिया की कीमतों में जारी उछाल पर न केवल ब्रेक लग गया है बल्कि मई की तुलना में जून के महीने में यूरिया की कीमतों में करीब 40 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में यूरिया का भाव घटकर 572 डॉलर प्रति टन पर आ गया है. वैश्विक स्तर पर सप्लाई चेन में आ रही रुकावटों के बावजूद भारत सरकार की दूरदर्शी नीतियों और घरेलू उत्पादन में आए बंपर उछाल के चलते मौजूदा खरीफ सीजन के लिए देश में खाद का पर्याप्त और कड़क स्टॉक मौजूद है.

चीन की पाबंदियां हटने से गिरा भाव?(Urea Price Fall India)

उद्योग जगत के जानकारों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर यूरिया की कीमतों में आई इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह चीन द्वारा फर्टिलाइजर एक्सपोर्ट पर लगाई गई पाबंदियों को ढीला करना है. इसके साथ ही लंबे समय से चले आ रहे युद्ध के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट से सप्लाई पूरी तरह ठप होने का जो डर बाजार में बना हुआ था, वह भी अब काफी हद तक कम हो गया है.

हालांकि, जून 2025 के मुकाबले अंतरराष्ट्रीय दरें अभी भी करीब 45 फीसदी ज्यादा बनी हुई हैं, लेकिन मई के मुकाबले जून में भाव का 572 डॉलर प्रति टन पर आना भारत के फर्टिलाइजर इंपोर्ट बिल और सब्सिडी बजट के लिए एक बेहद सुखद संकेत माना जा रहा है.

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रिकॉर्ड तोड़ घरेलू यूरिया उत्पादन

फर्टिलाइजर डिपार्टमेंट के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार की दूरगामी नीतियों का ही नतीजा (Urea Price Fall India) है कि मई और जून के महीनों में घरेलू यूरिया का उत्पादन तय किए गए टारगेट से कहीं ज्यादा रहा है. देश की फर्टिलाइजर कंपनियों द्वारा दिन-रात किया गया यह अतिरिक्त उत्पादन सरकार के लिए सबसे बड़ा ढाल साबित हुआ है.

हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सल्फर, अमोनिया और डीएपी (DAP) के दाम पिछले साल की तुलना में अभी भी बढ़े हुए हैं, जहां अकेले सल्फर की कीमतें 1,050 डॉलर प्रति टन के स्तर पर पहुंच गई हैं. इसके बावजूद भारत ने अपने घरेलू उत्पादन के दम पर वैश्विक महंगाई के थपेड़ों से भारतीय किसानों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है.

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-भारत एक्सप्रेस



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