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Delhi High Court: वर्जिनिटी टेस्ट सेक्सिस्ट, सच जानने के नाम पर महिला आरोपी का नहीं किया जा सकता यह परीक्षण- दिल्ली हाई कोर्ट

Delhi High Court: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि महिला आरोपी का ”कौमार्य परीक्षण” कराना असंवैधानिक, लैंगिक भेदभाव और गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है. कोर्ट ने कहा कि ऐसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है जो ‘कौमार्य परीक्षण’ का प्रावधान करती हो और ऐसा परीक्षण अमानवीय व्यवहार का एक रूप है.

यह आदेश जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने सिस्टर सेफी की याचिका पर सुनाया, जिन्होंने 1992 में केरल में एक नन की मौत से संबंधित आपराधिक मामले के सिलसिले में उनका ‘कौमार्य परीक्षण’ कराए जाने को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की थी. जस्टिस शर्मा ने कहा, ‘‘यह घोषित किया जाता है कि हिरासत में ली गयी एक महिला, जांच के दायरे में आरोपी, पुलिस या न्यायिक हिरासत में गयी महिला का कौमार्य परीक्षण असंवैधानिक और संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है, जिसमें गरिमा का अधिकार भी शामिल है.’’

यह परीक्षण लैंगिक भेदभाव पूर्ण- कोर्ट

कोर्ट ने कहा, “इसलिए, यह अदालत व्यवस्था देती है कि यह परीक्षण लैंगिक भेदभाव पूर्ण है और महिला आरोपी की गरिमा के मानवाधिकार का उल्लंघन है, अगर उसे हिरासत में रखते हुए इस तरह का परीक्षण किया जाता है.” कोर्ट ने जोर देकर कहा कि एक महिला की “हिरासत में गरिमा” की अवधारणा के तहत पुलिस हिरासत में रहते हुए भी सम्मान के साथ जीने का महिला का अधिकार शामिल है और उसका कौमार्य परीक्षण करना न केवल उसकी शारीरिक पवित्रता, बल्कि उसकी मनोवैज्ञानिक पवित्रता के साथ जांच एजेंसी के हस्तक्षेप जैसा है.

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कोर्ट ने यह भी कहा कि गरिमा का अधिकार तब भी निलंबित नहीं होता है, जब किसी व्यक्ति पर अपराध करने का आरोप लगाया जाता है या उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है तथा जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के तहत ही निलंबित किया जा सकता है, जो न्यायोचित एवं निष्पक्ष होना चाहिए, न कि मनमाना, काल्पनिक और दमनकारी. कोर्ट ने आगे कहा कि आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार उसी क्षण निलंबित हो जाता है, जब उसे गिरफ्तार किया जाता है, क्योंकि यह राज्य की सुरक्षा के लिए आवश्यक हो सकता है. हालांकि, आरोपी, विचाराधीन या दोषी व्यक्ति के गरिमा के अधिकार को निलंबित नहीं किया जा सकता.

-भारत एक्सप्रेस

कमल तिवारी

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