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प्रधानमंत्री मोदी 2 सितंबर को जल सुरक्षा शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को करेंगे संबोधित

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 सितंबर को जल सुरक्षा पर आयोजित विभागीय शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में शामिल होंगे. यह सम्मेलन नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में 1-2 सितंबर को आयोजित किया जाएगा.

देश में जल सुरक्षा और पानी से जुड़ी योजनाओं को लेकर केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल बनाने की दिशा में सरकार एक अहम पहल करने जा रही है. नई दिल्ली में 1 और 2 सितंबर को जल सुरक्षा पर दो दिवसीय विभागीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 सितंबर को इस सम्मेलन के समापन सत्र में शामिल होंगे और वहां मौजूद प्रतिनिधियों को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री के शाम करीब 4:30 बजे कार्यक्रम में पहुंचने की उम्मीद है.

इस सम्मेलन का मकसद सिर्फ पानी से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना नहीं है, बल्कि केंद्र और राज्य सरकारों को एक साथ बैठाकर उन चुनौतियों पर व्यावहारिक समाधान तलाशना है, जिनका सामना योजनाओं को जमीन पर लागू करते समय होता है.

सरकार के मुताबिक, सम्मेलन में ‘टीम इंडिया’ की भावना को मजबूत करने और सहकारी संघवाद को और प्रभावी बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा. यानी केंद्र और राज्य अपने-अपने स्तर पर काम करने के बजाय मिलकर राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे.

सम्मेलन में राजनीतिक नेतृत्व के साथ केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी भी हिस्सा लेंगे. इस दौरान अलग-अलग राज्यों में अपनाई जा रही अच्छी कार्यप्रणालियों को साझा किया जाएगा. साथ ही, योजनाओं को लागू करने में आने वाली अड़चनों पर भी खुलकर चर्चा होगी. कोशिश रहेगी कि चर्चा सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि उसके आधार पर स्पष्ट और समयबद्ध कार्ययोजनाएं तैयार की जा सकें.

पानी से जुड़े चार मुद्दों पर फोकस

जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में चार प्रमुख क्षेत्रों को केंद्र में रखा गया है. इनमें सबसे पहला मुद्दा जल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तय समय के भीतर पूरा करना है. सरकार चाहती है कि पानी से जुड़ी परियोजनाओं में अनावश्यक देरी कम हो और उनका फायदा लोगों तक जल्द पहुंचे.

दूसरा बड़ा विषय जल संचय में आम लोगों की भागीदारी है. इसके तहत ‘कैच द रेन’ अभियान पर खास जोर रहेगा. इसका उद्देश्य बारिश के पानी को ज्यादा से ज्यादा बचाना और स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण को बढ़ावा देना है.

तीसरा मुद्दा ग्रामीण और अन्य पेयजल प्रणालियों के लिए पानी के स्रोतों को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखना है. सिर्फ पाइपलाइन और नल पहुंचा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि आने वाले वर्षों में इन योजनाओं को पानी मिलता रहे.

चौथा फोकस जल जीवन मिशन 2.0 पर रहेगा. इसमें ग्रामीण इलाकों में नल से जल पहुंचाने वाली योजनाओं के संचालन और रखरखाव को बेहतर बनाने पर चर्चा होगी.

जल जीवन मिशन के अगले चरण में रखरखाव अहम

जल जीवन मिशन केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल है. इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक नल के जरिए सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है. अब मिशन के दूसरे चरण में सरकार का जोर इस बात पर है कि जिन घरों तक पानी पहुंच चुका है, वहां यह सुविधा लगातार और भरोसेमंद तरीके से चलती रहे.

इसके लिए जल स्रोतों की स्थिरता, पानी की उपलब्धता और योजनाओं के नियमित रखरखाव पर ध्यान देना जरूरी है. अगर पाइपलाइन या जल आपूर्ति व्यवस्था तैयार होने के बाद उसका सही तरीके से रखरखाव न हो, तो लोगों को लंबे समय तक इसका लाभ नहीं मिल पाएगा.

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-भारत एक्सप्रेस



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