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पश्चिम बंगाल में मजदूरों ने क्यों काटा है बवाल? BMS ने दिया अल्टीमेटम

पश्चिम बंगाल के बजबज स्थित FCI गोदाम पर भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने कर्मचारियों की छंटनी और टीएमसी यूनियन के प्रभाव में हो रही नियुक्तियों के खिलाफ जोरदार बवाल काटा है. बीएमएस ने बड़ा आंदोलन शुरू करने का अल्टीमेटम दिया है. जानें पूरी इनसाइड स्टोरी

West Bengal BMS

कोलकाता/संजय: पश्चिम बंगाल के बजबज में भारतीय खाद्य निगम (FCI) के गोदाम के बाहर अचानक भारी सियासी और सांगठनिक घमासान शुरू हो गया है. भारतीय मजदूर संघ (BMS) के नेतृत्व में सैकड़ों मजदूरों ने गोदाम के मुख्य गेट पर तालाबंदी जैसी स्थिति पैदा करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है. इलाके में बढ़ते तनाव के बीच अब हर किसी की जुबान पर एक ही सवाल है कि आखिर अचानक बंगाल के इन कामगारों का गुस्सा क्यों फूट पड़ा है?

बीएमएस (BMS) ने न केवल एफसीआई प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोला है, बल्कि सीधे तौर पर राज्य की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) के स्थानीय सिंडिकेट और कथित पक्षपात को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है. आइए जानते हैं क्या है इस पूरे बवाल के पीछे की असल वजह.

क्यों काटा है मजदूरों ने बवाल?

प्रदर्शन कर रहे भारतीय मजदूर संघ ने बजबज एफसीआई गोदाम के अधिकारियों को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपते हुए अपनी मांगों को लेकर तीखा रुख अपनाया है. मजदूरों के इस अचानक उग्र होने के पीछे निम्नलिखित मुख्य कारण सामने आए हैं.

  • भारतीय मजदूर संघ का सीधा आरोप है कि उनके संगठन (BMS) से जुड़े होने के कारण कई निर्दोष स्थानीय कर्मचारियों को मनगढ़ंत और झूठे आरोपों में फंसाकर नौकरी से निकाल दिया गया है.
  • संगठन ने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस से जुड़े स्थानीय ट्रेड यूनियन के अनुचित प्रभाव और दबाव में आकर बजबज शाखा में नई भर्तियां की जा रही हैं, जिसमें नियमों को ताक पर रख दिया गया है.

BMS का खुला अल्टीमेटम

बीएमएस ने एफसीआई (FCI) प्रबंधन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनके हटाए गए कर्मचारियों को ससम्मान वापस काम पर नहीं रखा गया और मनमानी नियुक्तियों को नहीं रोका गया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को और उग्र व व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी.

‘अवैध सिंडिकेट’ पर उठे सवाल

इस पूरे सांगठनिक बवाल के बीच बजबज एफसीआई अधिकारियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए पल्ला झाड़ने की कोशिश की है. प्रबंधन का कहना है कि ये नियुक्तियां सीधे भारतीय खाद्य निगम द्वारा नहीं की जाती हैं, बल्कि यह पूरी प्रक्रिया अनुबंधित थर्ड-पार्टी एजेंसियों के माध्यम से संचालित होती है. हालांकि, स्थानीय सूत्रों और ऑफ-कैमरा बातचीत में बजबज के लोगों ने एफसीआई गोदाम के इर्द-गिर्द चल रहे एक बड़े खेल का पर्दाफाश किया है.

सरकारी चावल की हेराफेरी

आरोप है कि इस गोदाम के अंदर और बाहर सरकारी राशन के चावल से जुड़ी भारी अनियमितताएं और आर्थिक हेराफेरी लंबे समय से चल रही है, जिसमें कुछ पूर्व और वर्तमान प्रभावशाली राजनेताओं की सीधी संलिप्तता रही है. स्थानीय निवासियों के अनुसार, एफसीआई के चावल से लदे भारी ट्रकों को उनके निर्धारित मार्ग के बजाय गैस प्लांट मोड़, चियार मोड़, बावाली और सातगाछिया जैसे सुदूर इलाकों में जानबूझकर खड़ा किया जाता है और वहां कथित तौर पर राशन की कालाबाजारी और अवैध गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है.

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लोगों का कहना है कि राज्य में राजनीतिक समीकरण बदलने के बावजूद, टीएमसी से जुड़े कुछ पुराने रसूखदार लोग अपना चोला बदलकर दोबारा एफसीआई गेट और लेबर यूनियन पर अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिशों में जुटे हैं. फिलहाल, इस पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और स्थानीय स्तर पर इस कथित चावल सिंडिकेट व ट्रांसफर-पोस्टिंग के खेल की एक निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है, ताकि इस पूरे विवाद की जड़ तक पहुंचा जा सके.



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