MP Congress Crisis: साल 2020 का वो मार्च का महीना भला कौन भूल सकता है, जब ‘महाराज’ यानी ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ अचानक पाला बदलकर कांग्रेस को बीच भंवर में छोड़ दिया था और कमलनाथ की सरकार ताश के पत्तों की तरह ढह गई थी. मध्य प्रदेश में कांग्रेस पैर जमाने की कोशिश करती है, उसकी अपनी ही अंदरूनी गुटबाजी का भूत उसे डराने आ जाता है. इन दिनों फिर से एक ही सवाल गूंज रहा है क्या मध्य प्रदेश में ‘कांग्रेस क्राइसिस पार्ट-2’ की स्क्रिप्ट लिखी जा चुकी है? क्योंकि, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और दिग्विजय सिंह के बीच छिड़े इस नए संग्राम से 2020 के सिंधिया कांड की कड़वी यादें ताजा हो गई हैं.
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि पार्टी पूरी तरह बिखराव की ओर बढ़ रही है, लेकिन मोहन यादव की सरकार को घेरने के चक्कर में कांग्रेस खुद अपने ही बुने भंवर में इस कदर फंस गई है कि अब कार्यकर्ताओं का मनोबल पूरी तरह टूट रहा है. आइए डिकोड करते हैं कि इस कथित ‘पार्ट-2’ संकट का पूरा सच क्या है और संगठन के भीतर किसके विरोध में कौन खड़ा हो गया है.
विवाद का केंद्र बना ‘दलाल’ शब्द का बखेड़ा (Congress Crisis Over Ujjain Land Controversy)
इस पूरे घमासान की शुरुआत एक सरकारी जमीन के मुद्दे से हुई, जिसने बहुत जल्द ‘जीतू पटवारी वर्सेस दिग्विजय सिंह’ का रूप ले लिया. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मोहन सरकार पर आरोप लगाया कि उज्जैन में ‘वीर भारत न्यास’ को 500 करोड़ की सरकारी जमीन महज 1 रुपये की लीज पर खैरात में दे दी गई, जिसका सीधा फायदा आरएसएस और बीजेपी के लोगों को हो रहा है.
इधर मध्य प्रदेश में पटवारी के इस बड़े हमले की हवा किसी और ने नहीं, बल्कि उनकी ही पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने निकाल दी. दिग्विजय ने विशेष रूप से उज्जैन जाकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कुछ आधिकारिक दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि वह न्यास कोई निजी नहीं, बल्कि विशुद्ध सरकारी ट्रस्ट है जिसके अध्यक्ष खुद मुख्यमंत्री होते हैं. इसलिए इसमें कोई अनियमितता नहीं है.
‘दलाल’ शब्द पर मचा बवाल
दिग्विजय सिंह यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे तीखा तंज कसते हुए कह दिया कि देश में ब्लैकमेलिंग करने वाले ‘दलाल’ किस्म के लोगों की कोई कमी नहीं है, जो बिना पुख्ता जानकारी के ऐसे झूठे आरोप लगाते रहते हैं. इस बयान को सीधे तौर पर जीतू पटवारी के खिलाफ माना गया, जिससे पूरी कांग्रेस बैकफुट पर आ गई.
कांग्रेस में छिड़ी अंदरूनी जंग (Leaders On MP Congress Crisis)
पार्टी की ‘पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (PAC)’ की वर्चुअल मीटिंग में नेताओं के सुर आपस में इस कदर टकराए कि पूरी एकजुटता तार-तार हो गई. संगठन के भीतर अब स्पष्ट गुटबाजी दिखाई दे रही है. पहले से राजा साहेब का विरोध करने वालों के लिए अब आधार मिल गया है और वो दिग्विजय सिंह के खिलाफ मुखर हो गए हैं.
कौन कर रहा है दिग्विजय का विरोध? (Who is With Jitu Patwari)
महासचिव निधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर ‘पुत्र-मोह’ का सीधा आरोप मढ़ दिया. FB पर लंबे पोस्ट में लिखा-
‘दिग्विजय सिंह अपने बेटे जयवर्धन सिंह को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाने की महत्वाकांक्षा में पार्टी अनुशासन भूल चुके हैं. जब भी कांग्रेस मजबूत होती है, वे अपने गैर-जिम्मेदाराना बयानों से रायता फैला देते हैं. वे पार्टी के भीतर एक ‘स्लीपर सेल’ की तरह काम कर रहे हैं, जो विपक्षी खेमे को ऑक्सीजन देता है. आलाकमान को उन पर तुरंत कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करनी चाहिए.’
अरुण यादव की राहुल गांधी से गुहार: अरुण यादव ने सीधे तौर पर राहुल गांधी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है. उन्होंने लिखा कि-
जब जमीन पर समर्पित कार्यकर्ता फासीवादी विचारधारा के खिलाफ लाठियां खा रहा है, तब कुछ जवाबदार लोग अपनी व्यक्तिगत वैमनस्यता और मिलीभगत की साजिश के तहत कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ रहे हैं. केंद्रीय नेतृत्व संघर्षशील कार्यकर्ताओं को बचाए.
आरिफ मसूद और प्रवीण पाठक का आक्रोश बढ़ा. पीएसी की मीटिंग में आरिफ मसूद और पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने तीखे सवाल उठाते हुए कहा कि
आरिफ मसूद- जब हमारे बड़े नेता ही प्रदेश अध्यक्ष के स्टैंड को सरेआम खारिज करेंगे, तो हम जनता के बीच क्या मुंह लेकर जाएंगे? वहीं पूर्व विधायक प्रवीण पाठक ने रोते हुए कहा कि मैदान पर कार्यकर्ता मर रहा है और बड़े नेताओं के ऐसे बयान हमें पूरी तरह बर्बाद कर देंगे.
दिग्विजय सिंह का बचाव में ‘डैमेज कंट्रोल’ (Who is With Digvijay Singh?)
ऐसा नहीं है कि इस सियासी जंग में दिग्विजय सिंह अकेले पड़ गए हैं. अगर उनके विरोध में एक खेमा खड़ा हुआ है तो एक और खेमा है जो उनके सममर्थन में उतर आया है. या यूम कहें की डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश कर रहा है. पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने अपने स्टैंड क्लियर किया है. पूर्व मंत्री पीसी शर्मा खुलकर दिग्विजय सिंह के बचाव में उतर आए हैं. उन्होंने निधि चतुर्वेदी पर पलटवार करते हुए कहा कि-
‘कुछ नेता सिर्फ संगठन में अपने नंबर बढ़ाने के लिए ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं, साथ ही उन्होंने निधि की सांगठनिक हैसियत पर भी सवाल खड़े कर दिए.’
दिग्विजय-जीतू की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस (Congress Crisis Jitu Patwari vs Digvijaya Singh)
विवाद को बहुत ज्यादा बढ़ता देख कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी के हस्तक्षेप के बाद दोनों नेताओं को एक साथ मीडिया के सामने आना पड़ा. दिग्विजय सिंह ने डैमेज कंट्रोल करते हुए अजीबोगरीब सफाई दी. उन्होंने कहा कि जीतू पटवारी मेरे बेटे समान हैं. मेरे बयान का गलत भ्रम फैलाया गया. मैंने जिस ‘दलाल’ शब्द का इस्तेमाल किया था, वह पटवारी के लिए नहीं बल्कि उस खबर को छापने वाले एक पत्रकार के लिए था, जिनका नाम भूपेंद्र दलाल है.
बीजेपी का मजे लेते हुए दिया ‘ओपन ऑफर’ (BJP On Congress Crisis)
इस पूरे घटनाक्रम पर सत्ताधारी दल बीजेपी जमकर चुटकी ले रही है. मंत्री विश्वास सारंग के तंज के बीच बीजेपी विधायक प्रीतम सिंह लोधी ने तो दिग्विजय सिंह को सीधे बीजेपी में शामिल होने का खुला न्योता तक दे डाला. लोधी ने हंसते हुए मीडिया से कहा कि आप राजा साहब (दिग्विजय) से धीरे से कहो कि जोर का झटका धीरे से लगा दें और चुपचाप भाजपा में आ जाएं. ‘महाराज’ (ज्योतिरादित्य सिंधिया) तो पहले ही भाजपा में आ चुके हैं, अब ‘राजा’ भी आ जाएं, फिर एमपी में राजा-महाराजा की जोड़ी सुपरहिट हो जाएगी. उन्होंने जीतू पटवारी को ‘फर्जी पटवारी’ बताते हुए तंज कसा.
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भले ही कांग्रेस इस घमासान को शांत करने के लिए 15 तारीख को मुख्यमंत्री के घेराव और आंदोलन की बड़ी-बड़ी रणनीतियां बना रही हो, लेकिन जीतू पटवारी (जो खुद विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और उनके रहते लोकसभा में कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला) के लिए यह सांगठनिक कलह उनके राजनीतिक भविष्य पर गहरी चिंता की लकीरें जरूर खींच रहा है. खैर अब देखना होगा कि दिल्ली के दखल के बाद ये ममाला शांत होता है या मध्य प्रदेश कांग्रेस में जल रही कांग्रेस क्राइसिस पार्ट-2 एक बार फिस से ऑपरेशन लोटस में बदल जाती है.
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