Delhi Car Blast: जम्मू-कश्मीर पुलिस की एक मामूली सी लगने वाली जांच ने देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके एक खतरनाक टेरर नेटवर्क को उजागर कर दिया. श्रीनगर के नौगाम इलाके में 19 अक्टूबर को जैश-ए-मोहम्मद के धमकी भरे पोस्टर्स मिलने से शुरू हुई यह जांच एक ऐसे मॉड्यूल तक पहुंची जिसमें डॉक्टर, मौलवी, छात्र और अन्य पेशेवर लोग शामिल थे. ये लोग व्हाइट कॉलर जॉब की आड़ में एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए भारत के कई शहरों में आतंकी हमलों की साजिश रच रहे थे.
कैसे शुरू हुई जांच?
श्रीनगर के बुनपोरा इलाके में रातोंरात जैश-ए-मोहम्मद के पोस्टर्स चिपके मिले थे. पुलिस ने यूएपीए, बीएनएस, एक्सप्लोसिव एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया. सीसीटीवी फुटेज से तीन ओवर ग्राउंड वर्कर्स अरिफ डार, यासिर-उल-अशरफ और मकसूद डार की पहचान हुई. इनकी गिरफ्तारी से जांच की पहली कड़ी मिली.
मौलवी से डॉक्टरों तक
इन OGW से पूछताछ के बाद पुलिस शोपियां के मौलवी इरफान अहमद तक पहुंची, जो जीएमसी श्रीनगर में पैरामेडिकल स्टाफ और मस्जिद का इमाम था. इरफान ने डॉक्टरों को कट्टरपंथी बनाने में अहम भूमिका निभाई. उसके फोन से पाकिस्तान के उमर बिन खत्ताब से जुड़े टेलीग्राम चैनल का पता चला.
डॉक्टरों की गिरफ्तारी
5 नवंबर को सहारनपुर से डॉ. आदिल राठर को गिरफ्तार किया गया. उसने डॉ. मुजम्मिल गनई और डॉ. शाहीन सईद के नाम बताए. 8 नवंबर को फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से डॉ. मुजम्मिल को पकड़ा गया. उसके किराए के कमरे से 2,900 किलोग्राम IED सामग्री और हथियार मिले. आदिल के पुराने लॉकर से एक AK-47 भी बरामद हुई.
दिल्ली ब्लास्ट और उमर नबी
10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास i20 कार में विस्फोट हुआ. शाम 6:52 बजे नेताजी सुभाष मार्ग पर कार में रखा IED अनजाने में डेटोनेट हो गया. जांच में पता चला कि कार आतंकी डॉ. उमर नबी चला रहा था, जो इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड था. विस्फोट में उमर और दो अन्य की मौत की आशंका है.
डीएनए जांच और अन्य गिरफ्तारियां
11 नवंबर को पुलवामा से 6 लोगों को हिरासत में लिया गया, जिनमें उमर नबी के माता-पिता, दोस्त और सहयोगी शामिल थे. इनका डीएनए सैंपल लेकर कार के मलबे से मिले डीएनए से मिलान किया जा रहा है. अब तक 9 संदिग्ध गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें गंदरबल के जमीर और मेवात के मौलवी इश्तियाक भी शामिल हैं.
‘डॉक्टर्स ऑफ टेरर’ का नेटवर्क
यह मॉड्यूल दो साल से सक्रिय था. आरोपी डॉक्टरों ने सोशल और एकेडमिक एक्टिविटीज के बहाने फंड जुटाया और पाकिस्तान हैंडलर्स से संपर्क बनाए रखा. दिल्ली को टारगेट करने की योजना थी क्योंकि यह फरीदाबाद के पास और राष्ट्रीय राजधानी है. सभी बातचीत एन्क्रिप्टेड ऐप्स पर होती थी ताकि सुरक्षा एजेंसियों से बचा जा सके.
काउंटर टेररिज्म की बड़ी सफलता
जम्मू कश्मीर पुलिस ने इसे बड़ी कामयाबी बताया है. प्रवक्ता ने कहा कि यह जांच रेडिकल प्रोफेशनल्स के व्हाइट कॉलर टेरर इकोसिस्टम को उजागर करती है. फाइनेंशियल ट्रेल और अन्य लिंक की जांच जारी है.
यह मामला इसलिए बेहद गंभीर है क्योंकि इसमें डॉक्टर जैसे सम्मानित पेशे के लोग शामिल थे, जो देश की सेवा की बजाय उसे दहलाने की साजिश में लगे थे. यह जांच बताती है कि आतंक अब सिर्फ जंगलों या सीमाओं तक सीमित नहीं रहा बल्कि वह अब शहरों के भीतर, हॉस्पिटलों और यूनिवर्सिटियों में भी पनप रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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