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कौन हैं जस्टिस हरीश कुमार? जिनके कंधों पर आया बिहार में परीक्षा सुधार का जिम्मा

बिहार में BPSC, पुलिस भर्ती और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सुधार के लिए पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार की अध्यक्षता में 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया गया है. समिति 3 महीने में राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

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बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं, ‘पेपर लीक’ और भर्ती प्रक्रियाओं में होने वाली लगातार गड़बड़ियों से लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य दांव पर रहता है. लेकिन अब राज्य सरकार ने इस पूरे सिस्टम को ‘हैक प्रूफ’ और पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. बिहार में प्रतियोगिता परीक्षाओं में व्यापक सुधार के लिए गठित 5 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का अध्यक्ष पटना हाईकोर्ट के न्यायाधीश हरीश कुमार को बनाया गया है.

महाधिवक्ता की अनुशंसा पर सरकार की मुहर

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 1 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस समिति के गठन का प्रावधान 23 अगस्त 2026 को ही कर लिया गया था. अध्यक्ष के चयन के लिए राज्य सरकार ने पटना हाईकोर्ट के महाधिवक्ता से अनुशंसा मांगी थी. इसके बाद 28 अगस्त को हाईकोर्ट ने न्यायमूर्ति हरीश कुमार के नाम की सिफारिश की, जिस पर सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव मो. सोहैल ने अपनी मुहर लगाते हुए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया.

क्या होंगे इस विशेषज्ञ समिति के मुख्य टास्क?

इस 5 सदस्यीय समिति को गठन के दिन से ठीक तीन महीने (90 दिन) के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट और अनुशंसाएं राज्य सरकार को सौंपनी हैं.

  • भर्ती एजेंसियों का मूल्यांकन: BPSC, BPSSC, बिहार विद्यालय परीक्षा समिति और विभिन्न विश्वविद्यालयों की मौजूदा भर्ती प्रक्रियाओं की गहन समीक्षा करना.
  • प्रश्नपत्रों की अभेद्य सुरक्षा: पेपर लीक को रोकने के लिए प्रश्नपत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परीक्षा केंद्रों के मैनेजमेंट को कड़ा करना.
  • हाई-टेक व्यवस्था: परीक्षाओं के सफल और सुरक्षित संचालन के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना और अभ्यर्थियों की सुविधाओं में सुधार लाना.
  • पारदर्शिता: पूरे सिस्टम की खामियों को जड़ से खत्म कर उसे विश्वसनीय और पारदर्शी बनाना.

लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य की उम्मीद

हर साल बिहार में विभिन्न आयोगों और बोर्डों की भर्ती परीक्षाओं में लाखों छात्र बैठते हैं. सरकार की यह पहल सिर्फ प्रशासनिक सुधार नहीं है, बल्कि यह राज्य के लाखों युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ है. अब पूरे बिहार के युवाओं की नजरें जस्टिस हरीश कुमार की इस समिति और 3 महीने बाद आने वाली उनकी सिफारिशों पर टिकी हैं, जिससे एक निष्पक्ष और सुरक्षित भर्ती माहौल बन सके.



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