Who is Shashikant Suthar: नीट यूजी 2026 परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोपों ने इस वक्त देश के सियासी और शैक्षिक गलियारों में तूफान खड़ा कर रखा है. लाखों छात्र सड़कों पर हैं और अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश की इस सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में चल रहे खेल को सबसे पहले बेनकाब किसने किया? इस पूरे महाघोटाले के पीछे राजस्थान के प्रमुख एजुकेशन हब ‘सीकर’ के रहने वाले शशिकांत सुथार का नाम सबसे आगे चल रहा है. शशिकांत वही व्हिसलब्लोअर (सच्चाई सामने लाने वाले) हैं, जिन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और जांच एजेंसियों के सामने सबसे पहले पुख्ता सबूतों के साथ इस गड़बड़ी का कच्चा चिट्ठा खोला था.
मीडिया से बातचीत में शशिकांत सुथार ने उस दिन की पूरी कहानी बयां की है, जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो जाएं. उन्होंने बताया कि किस तरह परीक्षा वाले दिन ही उन्हें इस बड़े रैकेट की भनक लग गई थी और उन्होंने चुप बैठने के बजाय सिस्टम से लड़ने का फैसला किया.
आधी रात को पहुंचे पुलिस के पास
शशिकांत सुथार के मुताबिक, यह पूरी कहानी 3 मई 2026 यानी नीट परीक्षा वाले दिन ही शुरू हो गई थी. दोपहर बाद उन्हें कुछ परीक्षा केंद्रों और सोशल मीडिया के जरिए कुछ ऐसी संदिग्ध गतिविधियों के बारे में पता चला, जिससे पेपर लीक होने का गहरा शक हुआ. मामला देश के लाखों बच्चों के भविष्य से जुड़ा था, इसलिए शशिकांत ने एक पल भी गंवाना ठीक नहीं समझा. वे उसी दिन आधी रात को स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंच गए.
चूंकि रात काफी हो चुकी थी इसलिए पुलिस अधिकारियों ने उनसे कहा कि वे मामले से जुड़े सभी जरूरी कानूनी दस्तावेज, वॉट्सऐप चैट के स्क्रीनशॉट और पुख्ता सबूत एक साथ समेटकर अगले दिन सुबह आएं. इसके बाद शशिकांत पीछे नहीं हटे बल्कि उन्होंने पूरी रात जागकर कथित पेपर लीक से जुड़े डिजिटल साक्ष्य और संदिग्ध स्क्रीनशॉट्स जुटाए. सुबह होते ही उन्होंने ये सारे सबूत सीधे एनटीए (NTA) के शीर्ष अधिकारियों को भेज दिए.

सबूत मिलते ही हिल गया पूरा सिस्टम
शशिकांत का दावा है कि उनके द्वारा भेजे गए डिजिटल सबूत इतने मजबूत थे कि एनटीए के अधिकारी भी सन्न रह गए. वे बताते हैं, “जैसे ही मैंने ये साक्ष्य अधिकारियों के साथ साझा किए, पूरे महकमे में हड़कंप मच गया. सबूत सौंपने के महज दो घंटे के भीतर ही मुझे बड़ी जांच एजेंसियों और अधिकारियों के फोन आने शुरू हो गए.” इसके बाद ही एनटीए और सतर्कता टीमों ने देश के अलग-अलग कोनों में छापेमारी और जांच की रफ्तार को तेज किया.
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‘सीकर के बच्चे स्कैमर नहीं, मेगावॉट स्टूडेंट्स हैं’
इस विवाद के सामने आने के बाद जहां सीकर के कोचिंग कल्चर और वहां के परीक्षा केंद्रों पर उंगलियां उठ रही हैं, वहीं शशिकांत सुथार ने अपने शहर के बच्चों का ढाल बनकर बचाव किया है. उन्होंने बेहद साफ लहजे में कहा कि सीकर के कोचिंग सेंटरों की सफलता के पीछे किसी धांधली का नहीं, बल्कि यहाँ के बच्चों की दिन-रात की हाड़-तोड़ मेहनत का हाथ है.
शशिकांत ने इन होनहार बच्चों को ‘मेगावॉट स्टूडेंट्स’ का नाम दिया. उन्होंने कहा कि कुछ भ्रष्ट लोगों के लालच और गलत हरकतों की वजह से सालों तक बंद कमरों में पसीना बहाने वाले ईमानदार और मेहनती छात्रों के करियर को शक के दायरे में नहीं खड़ा किया जाना चाहिए.
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