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कौन थे हिंदी गद्य को नई दिशा देने वाले साहित्यकार? इंग्लैंड में भी गूंजी लेखनी, जानें पूरी कहानी

हिंदी साहित्य में एक ऐसा नाम, जिन्होंने भारतेंदु युग से पहले ही हिंदी गद्य को मजबूती दी और उसे एक नई पहचान दिलाई.

कौन थे हिंदी गद्य को नई दिशा देने वाले साहित्यकार? इंग्लैंड में भी गूंजी लेखनी, जानें पूरी कहानी- भारत एक्सप्रेस

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राजा लक्ष्मण सिंह (Raja Laxman Singh) हिंदी साहित्य (Hindi Literature) में एक ऐसा नाम हैं, जिन्होंने भारतेंदु युग (Bhartendu era) से पहले ही हिंदी गद्य (Hindi Prose) को मजबूती दी और उसे एक नई पहचान दिलाई. उनका जन्म 9 अक्टूबर 1826 को आगरा के वजीरपुरा में हुआ था. प्रारंभिक शिक्षा में संस्कृत (Sanskrit) और उर्दू (Urdu) सीखी, फिर आगरा कॉलेज से अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त की थी. 1847 में उन्हें लेफ्टिनेंट गवर्नर के कार्यालय में अनुवादक नियुक्त किया गया था. उनकी प्रशासनिक योग्यता ने उन्हें तहसीलदार और बाद में डिप्टी कलेक्टर तक पहुंचाया दिया. अंग्रेजों द्वारा उन्हें ‘राजा’ की उपाधि से सम्मानित किया गया था.

साहित्य से प्रेम

लेकिन उनका हमेशा से प्रेम साहित्य था. उन्होंने हिंदी को संस्कृत के करीब लाकर उसकी शैली और शब्दावली को शुद्ध किया था. 1861 में ‘प्रजा हितैषी’ नाम की पत्रिका की शुरुआत की थी, जो हिंदी पत्रकारिता के इतिहास में मील का पत्थर बनी. 1863 में कालिदास की ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ का अनुवाद ‘शकुंतला नाटक’ के रूप में प्रस्तुत किया था. शकुंतला नाटक को ब्रिटेन तक ख्याति मिली थी.

यह कृति सिविल सेवा की परीक्षा का हिस्सा अनुवादित रचनाओं में ‘रघुवंश’ और ‘मेघदूत’ शामिल हैं. इसमें उन्होंने अवधी और ब्रजभाषा का प्रयोग किया. उनका मानना था कि हिंदी को अरबी-फारसी प्रभाव से मुक्त कर उसे संस्कृत और देशज बोलियों के आधार पर विकसित किया जाना चाहिए. यह सोच हिंदी को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बेहद प्रभावी रही.

मेघदूत का अनुवाद

इसके अलावा उन्होंने 1877 में रघुवंश और 1881 से 1883 में मेघदूत का अनुवााद किया था. इस पुस्तक में अवधी और ब्रजभाषा के शब्दों के साथ-साथ अलग-अलग छंदों का सुंदर प्रयोग किया गया था.

शिक्षा और संस्कति के क्षेत्र में योगदान

राजा लक्ष्मण सिंह ने समाज सुधारक के रूप में भी शिक्षा और संस्कृति के क्षेत्र में योगदान दिया था. हिंदी साहित्य के इस प्रेरणास्रोत का निधन 14 जुलाई 1896 को हुआ. उनका जीवन साहित्य और समाज सेवा का आदर्श है.

-भारत एक्सप्रेस



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