who will lead ncp after Ajit Pawar: बुधवार को आई एक दुखद खबर ने न सिर्फ महाराष्ट्र को बल्कि पूरे देश को शोक में डाल दिया है. महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रमुख अजित पवार (Ajit Pawar) अब हमारे बीच नहीं रहे. 29 जनवरी की सुबह एक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गई. उनकी मौत महाराष्ट्र की सियासत में महायुति गठबंधन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
हालांकि महायुति गठबंधन (बीजेपी-शिवसेना-NCP) महाराष्ट्र की सत्ता पर अपना कब्जा जमाए हुए हैं. लेकिन राजनीतिक गलियारों में अब चर्चा तेज हो गई है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस (NCP) की बागडोर अब कौन संभालेगा और क्या महाराष्ट्र को मिलेगा उसका नया डिप्टी सीएम जो अजित पवार की जगह लेगा. आइए जानते हैं.
महाराष्ट्र में सियासी आंकड़े क्या कहते हैं?
महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों पर हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी. गठबंधन में बीजेपी (BJP) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. भाजपा को 132 सीटें मिली थीं. वहीं इसके सहयोगी शिवसेना (एकनाथ शिंदे) को 57 सीटें मिलीं. साथ ही अजित पवार की NCP में 41 विधायक चुने गए.
हालांकि अब चर्चा तेज हो गई है कि 41 विधायकों का नेता कौन होगा. आखिर कौन होगा वो जो अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की विरासत को संभालेगा.
सुनेत्रा पवार (पत्नी) (who will lead ncp after ajit pawar)
अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार को इस समय पार्टी की कमान संभालने की सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है. बारामती की जनता से उनका सीधा और पुराना जुड़ाव रहा है. वे वर्षों से अजित पवार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी स्वीकार्यता व्यापक है. ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि पार्टी को टूट से बचाने और संगठन को एकजुट रखने के लिए नेतृत्व की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी जा सकती है.
पार्थ पवार और जय पवार (बेटे)
अजित पवार के बड़े बेटे पार्थ पवार को राजनीति का अनुभव है, हालांकि उन्हें पिछले चुनावों में हार का सामना करना पड़ा है. छोटे बेटे जय पवार फिलहाल सक्रिय राजनीति से दूर रहते हुए पर्दे के पीछे संगठनात्मक कामकाज संभालते रहे हैं. समर्थकों का एक वर्ग चाहता है कि ‘दादा’ की राजनीतिक विरासत परिवार के ही किसी सदस्य के हाथों में जाए, लेकिन सीमित राजनीतिक अनुभव दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है.
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प्रफुल्ल पटेल
पार्टी के भीतर प्रफुल्ल पटेल सबसे अनुभवी और रणनीतिक चेहरा माने जाते हैं. अजित पवार के विद्रोह के दौरान वे उनके सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रहे. संगठन को एकजुट रखने और महायुति गठबंधन में पार्टी की मजबूत मौजूदगी बनाए रखने में उनकी भूमिका अहम हो सकती है. उन्हें पार्टी के ‘मार्गदर्शक’ की भूमिका में देखा जा रहा है, हालांकि बड़ा सवाल यह है कि क्या बारामती की जनता किसी ऐसे नेता को स्वीकार करेगी, जो स्थानीय राजनीति से सीधे तौर पर जुड़ा नहीं रहा है.
महाराष्ट्र की राजनीति को बड़ा झटका
अजित पवार का जाना सत्तारूढ़ महायुति सरकार (बीजेपी–शिवसेना–एनसीपी) के लिए बड़ा नुकसान माना जा रहा है. वे गठबंधन के अहम रणनीतिकार और संकटमोचक थे, जिनकी गैरमौजूदगी से सत्ता संतुलन बिगड़ सकता है. वहीं, विपक्षी महाविकास अघाड़ी के लिए यह खोई हुई जमीन वापस पाने का मौका हो सकता है.
अजित पवार ने राजनीति में ‘दादागिरी’ और विकास का अलग पैमाना स्थापित किया. उनका जाना सिर्फ एक पार्टी नहीं, बल्कि उस नेता का खो जाना है जो हर सुबह जनता के बीच मौजूद रहता था. अब बारामती के ‘पावर हाउस’ की कमान किसके हाथ आएगी, यह आने वाला समय तय करेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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