लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े तीनों बिलों पर मतदान जारी रहा. पहले राउंड में बिल के पक्ष में 278 और विपक्ष में 211 वोट पड़े, कुल 489 वोट डाले गए. हालांकि यह बिल पारित नहीं हो सका. इसके बाद संविधान संशोधन बिल पर हुई वोटिंग में भी इसे मंजूरी नहीं मिल पाई. इस दौरान बिल के समर्थन में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े, जिससे यह लोकसभा में अस्वीकृत हो गया.
कम पड़ गए 54 वोट
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान संशोधन बिल पर कुल 528 वोट पड़े. इसे पास करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट चाहिए थे, लेकिन समर्थन में सिर्फ 298 वोट मिले. इसके खिलाफ 230 सांसदों ने वोट किया. इसी के साथ 54 वोट के चलते बिल पास नहीं हो सका.
अर्जुन राम मेघवाल ने पेश किया बिल
महिला आरक्षण बिल विशेष सत्र के दूसरे दिन कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने पेश किया था. इसके बाद स्पीकर ओम बिरला ने मतदान की प्रक्रिया कराई और सभी सदस्यों को लॉबी खाली करने का निर्देश दिया.
11 साल में पहली बार हुआ ऐसा
पिछले 11 सालों में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार संसद में कोई बिल पास नहीं करा पाई. इससे पहले अमित शाह ने लगभग एक घंटे तक भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर यह बिल पारित नहीं होते हैं तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी. उन्होंने यह भी कहा था कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके अधिकारों की राह में कौन बाधा बन रहा है.
विपक्ष ने क्या कहा?
बिल गिरने के बाद विपक्ष ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने सरकार को पराजित किया है. राहुल गांधी ने कहा कि उन्होंने संविधान पर हुए कथित हमले को रोक दिया है. उनके अनुसार यह सिर्फ महिला आरक्षण बिल नहीं था, बल्कि देश की राजनीतिक व्यवस्था में बदलाव करने की कोशिश थी.
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प्रियंका गांधी ने कहा कि यह लोकतंत्र और देश की एकता के लिए बड़ी जीत है. उन्होंने यह भी कहा कि यह संविधान पर हमला था, जिसे विपक्ष ने सफल नहीं होने दिया. शशि थरूर ने कहा कि कांग्रेस हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में रही है और आज भी इसका समर्थन करती है, लेकिन इसे परिसीमन से जोड़ना सही नहीं है.
-भारत एक्सप्रेस
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