एलन मस्क का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार के साथ बड़े टकराव की स्थिति में आ गया है. कंपनी ने सोमवार को घोषणा की कि वह कर्नाटक हाईकोर्ट के उस हालिया फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी. एक्स का आरोप है कि यह पोर्टल देश भर अधिकारियों को बिना किसी न्यायिक समीक्षा के केवल ‘अवैधता’ के आधार पर कंटेंट हटाने का मनमाना अधिकार देता है. कंपनी का कहना है कि यह न केवल सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के खिलाफ है, बल्कि भारतीयों की अभिव्यक्ति की आज़ादी जैसे संवैधानिक अधिकारों का भी उल्लंघन करता है.
एलन मस्क के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) ने हाल ही में कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपील करने का फैसला किया है, जिसमें सरकार के “सहयोग पोर्टल” को मंजूरी दी गई थी. इस पोर्टल के जरिए देशभर के करीब 20 लाख पुलिस अधिकारी कंटेंट हटाने का आदेश दे सकते हैं.
क्या है सहयोग पोर्टल?
सहयोग पोर्टल अक्टूबर 2023 में शुरू किया गया था, जिसके जरिए अधिकृत अधिकारी सीधे टेक कंपनियों तक कंटेंट हटाने का आदेश भेज सकते हैं. एक्स का आरोप है कि यह पोर्टल अधिकारियों को मनमाने ढंग से कंटेंट हटाने का अधिकार देता है, जिसमें न्यायिक समीक्षा नहीं होती और न ही प्रभावित यूजर्स को सुनवाई का मौका मिलता है.
एक्स और सरकार के बीच टकराव
एक्स और भारत सरकार के बीच कंटेंट हटाने को लेकर यह पहली लड़ाई नहीं है. पहले भी कंपनी कई बार सरकार के आदेशों को सेंसरशिप करार दे चुकी है. एलन मस्क खुद को फ्री स्पीच एब्सोल्यूटिस्ट बताते हैं और कई देशों की सरकारों के साथ कंटेंट मॉडरेशन को लेकर उनका टकराव रहा है.
अब आगे क्या हो सकता है?
अब अदालतों में होने वाली सुनवाई यह तय करेगी कि भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर कंटेंट मॉडरेशन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन कैसे बनाया जाएगा. यह मामला न केवल एक्स के लिए बल्कि पूरे सोशल मीडिया इकोसिस्टम के लिए अहम साबित हो सकता है. एक्स ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “हम इस आदेश को चुनौती देंगे ताकि फ्री स्पीच की रक्षा की जा सके.
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सुप्रीम कोर्ट से तय होगी आगे की राह
यह कानूनी लड़ाई भारत में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सामग्री मॉडरेशन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन को परिभाषित करने जा रही है. एक तरफ, भारत सरकार दूसरी ओर एलन मस्क विदेशी कंपनी एक्स है. अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि क्या पुलिस अधिकारियों के लिए सीधे कंटेंट हटाने का यह फेसलेस सिस्टम आईटी एक्ट की धारा 69A और श्रेया सिंघल फैसले के अनुरूप है या नहीं.
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