रिपोर्ट- अभिषेक
यवतमाल नगर परिषद चुनाव के नतीजों ने शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के अंदर की कलह को सड़क पर ला दिया है. चुनाव में मिली करारी हार जहां पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका. अब पार्टी नेताओं के बीच ‘तू-तू मैं-मैं’ और हंगामे का कारण बन गई है.
इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं पूर्व पदाधिकारी संतोष ढवले. चुनाव में मिली शून्य सीटों से नाराज ढवले ने सीधे तौर पर सांसद संजय देशमुख को निशाने पर लिया है. ढवले का मानना है कि पार्टी की इस दुर्गति के लिए पूरी तरह से सांसद देशमुख की कार्यशैली जिम्मेदार है.
विरोध जताने के लिए ढवले ने एक अनोखा और थोड़ा व्यंग्यात्मक तरीका चुना. उन्होंने सांसद के जीरो परफॉर्मेंस के लिए एक ‘नकली सम्मान समारोह’ आयोजित करने का ऐलान कर दिया. यह कार्यक्रम यवतमाल के उत्सव मंगल कार्यालय में होना था, लेकिन इसे लेकर जो ड्रामा हुआ, उसने शहर के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी.
जब कार्यक्रम स्थल पर भिड़ गए शिवसैनिक
जैसे ही इस ‘सम्मान समारोह’ की खबर उभाठा गुट के जिला अध्यक्ष राजेंद्र गायकवाड़ को लगी, वे अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए. गायकवाड़ और उनके साथ आए शिवसैनिकों ने ढवले के इस कदम को पार्टी विरोधी बताते हुए जमकर हंगामा किया. देखते ही देखते उत्सव मंगल कार्यालय में तनाव फैल गया और हंगामे की वजह से कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही रुक गया.
पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह के सार्वजनिक तमाशे से पार्टी की छवि खराब होती है. उनका मानना है कि अगर कोई शिकायत थी, तो उसे पार्टी के भीतर सुलझाना चाहिए था, ना कि इस तरह का विवादित आयोजन करके भ्रम फैलाना चाहिए.
पार्टी से छुट्टी और बढ़ता तनाव
इस अनुशासनहीनता को देखते हुए शिवसेना (UBT) ने कड़ा रुख अपनाया है और संतोष ढवले को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है. हालांकि, ढवले के निष्कासन के बावजूद यवतमाल में शिवसैनिकों के बीच की खाई कम होती नहीं दिख रही है. जमीन पर कार्यकर्ताओं के दो गुट बन चुके हैं, जिससे आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर संघर्ष और तेज होने के आसार हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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