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Yogi Cabinet Expansion 2026: उत्तर प्रदेश की सियासत में आज का रविवार कोई साधारण छुट्टी का दिन नहीं, बल्कि साल 2027 के चुनावों के लिए BJP की रणनीति है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कैबिनेट के 6 नए चेहरे उत्तर प्रदेश की सियासी गणित को साधने के हथियार बन गए है. आइए समझते है जातियों और क्षेत्रों का ऐसा ‘सोशल इंजीनियरिंग’ वाला गणित कैसे बैठाया गया है, जो सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ के रथ को रोकने की ताकत रखता है.
6 नए चेहरों में 1 ब्राह्मण, 3 ओबीसी और 2 दलित चेहरों को जगह देकर भाजपा ने ये साफ कर दिया है कि वह 2027 की लड़ाई में किसी भी वर्ग को नाराज छोड़ने के मूड में नहीं है.
क्यों खास है नई टीम?
भाजपा जानती है कि लोकसभा चुनाव में दलित और ओबीसी वोटों में जो हल्की सी ‘सेंधमारी’ हुई थी, उसे भरने का वक्त आ गया है. सवर्णों, खासकर ब्राह्मणों की कथित नाराजगी को दूर करने के लिए जहां मनोज पांडेय जैसा बड़ा चेहरा शामिल किया गया है, वहीं दलित और पिछड़ों को भागीदारी देकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ के नारे को जमीन पर उतारने की कोशिश की गई है.
1. भूपेंद्र सिंह चौधरी: जाटों को साधने का सबसे बड़ा दांव
मुरादाबाद के रहने वाले और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी पश्चिमी यूपी का एक ऐसा जाट चेहरा हैं, जिनका दबदबा संगठन और सरकार दोनों में रहा है. उन्हें फिर से कैबिनेट में लाना और चर्चा के मुताबिक PWD जैसा भारी-भरकम विभाग देना, सीधा संकेत है कि भाजपा जाटों, गुर्जरों और किसानों को अपने पाले में पूरी तरह लॉक करना चाहती है.
2. मनोज पांडेय: सपा के गढ़ में ‘ब्राह्मण’ धमाका
रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक मनोज पांडेय को शामिल करना इस विस्तार की सबसे बड़ी ‘हेडलाइन’ है. सपा के मुख्य सचेतक रहे पांडेय ने जब पाला बदला, तो उन्होंने केवल एक सीट नहीं बदली, बल्कि अवध और पूर्वांचल के ब्राह्मणों के बीच भाजपा की साख और मजबूत की. 2027 में ब्राह्मण वोट बैंक को एकजुट रखने के लिए वह पार्टी के सबसे बड़े मोहरे होंगे.
3. कृष्णा पासवान: दलित महिलाओं और पासी बिरादरी की आवाज
फतेहपुर की खागा सीट से 4 बार की विधायक कृष्णा पासवान की प्रोफाइल बेहद दिलचस्प है. एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से अपने सफर की शुरुआत करने वाली कृष्णा आज यूपी भाजपा का विश्वसनीय चेहरा हैं. दलितों, खासकर पासी समाज और महिलाओं को जोड़ने के लिए उनका नाम इस टीम में संजीवनी का काम करेगा.
4. हंसराज विश्वकर्मा: वाराणसी से ओबीसी की हुंकार
हंसराज विश्वकर्मा पिछले 34 वर्षों से राजनीति की रग-रग से वाकिफ हैं. राम मंदिर आंदोलन से लेकर वाराणसी में पीएम मोदी की बड़ी जीत तक, उनका योगदान अतुलनीय रहा है. ओबीसी वर्ग, विशेषकर विश्वकर्मा समाज के बीच उनकी पकड़ भाजपा को पूर्वांचल में मजबूती देगी.
5. सुरेंद्र दिलेर: दलित युवाओं का नया जोश
अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक सुरेंद्र दिलेर उस ‘दिलेर’ परिवार से आते हैं, जिसकी तीन पीढ़ियां राजनीति में समर्पित रही हैं. हाथरस और अलीगढ़ बेल्ट में दलित युवाओं के बीच उनका क्रेज भाजपा के लिए किसी ‘वोट बैंक’ से कम नहीं है.
6. कैलाश सिंह राजपूत: कन्नौज के ‘रणबांकुरे’
कन्नौज की तिर्वा सीट से विधायक कैलाश राजपूत को लोध और पिछड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए चुना गया है. बसपा से भाजपा में आए कैलाश जमीनी पकड़ वाले नेता हैं और 2027 में ‘पिछड़ों’ को भाजपा से जोड़े रखने में उनकी भूमिका अहम होगी.
प्रमोशन और परफॉर्मेंस का रिपोर्ट कार्ड
सरकार सिर्फ नए चेहरों पर दांव नहीं लगा रही, बल्कि पुराने खिलाड़ियों का मनोबल भी बढ़ा रही है. नरेंद्र कश्यप, अजीत पाल और सोमेंद्र तोमर का प्रमोशन इस बात का सबूत है कि जो जमीन पर काम करेगा, उसे इनाम मिलेगा. पाल समाज को साधने के लिए अजीत पाल को बड़ी जिम्मेदारी देना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.
क्षेत्रीय संतुलन का समीकरण
यूपी की राजनीति कुल चार हिस्सों में बटी हई है- पूर्वांचल, पश्चिमांचल, अवध और बुंदेलखंड.अगर बात करें पूर्वांचल की तो पीएम मोदी और सीएम योगी खुद यहां से आते हैं. साथ ही राजभर, निषाद पार्टी और अपना दल के साथ भाजपा का यहां पहले से ही भारी प्रतिनिधित्व है.
वहीं, पश्चिमांचल में भूपेंद्र चौधरी और सोमेंद्र तोमर जैसे चेहरों के जरिए भाजपा ने किसान आंदोलन के बाद पैदा हुई चुनौतियों को खत्म करने की योजना बनाई है. अवध के हिस्से में मनोज पांडेय और कृष्णा पासवान के जरिए अवध के दुर्ग को अभेद्य बनाने की कोशिश की गई है.
यूपी विधानसभा का मौजूदा गणित: आंकड़ों में शक्ति
योगी सरकार में फिलहाल मुख्यमंत्री समेत 54 मंत्री हैं. 6 नए शामिल होने के बाद यह संख्या 60 पहुंच जाएगी, जो कि अधिकतम सीमा है. भाजपा के पास विधानसभा में 258 विधायक हैं, जिनमें जातिवार संतुलन कुछ ऐसा है:
- राजपूत: 45
- ब्राह्मण: 42
- OBC: 84
- SC: 59
वहीं अगर बात करें विधान परिषद की तो वहां भी 79 सदस्यों के साथ भाजपा काफी मजबूत स्थिति में है. बता दें कि इस बार का विस्तार से भाजपा 2027 की पिच पर सिर्फ खेलने के लिए नहीं, बल्कि क्लीन स्वीप करने के लिए उतरने वाली है.
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-भारत एक्सप्रेस
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