दिल्ली हाई कोर्ट ने किरोड़ीमल कॉलेज छात्र संघ के 2024-2025 सत्र में केंद्रीय पार्षदों की दो रिक्त सीटों पर तत्काल प्रभाव से चुनाव कराने की मांग पर दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है. जस्टिस सचिन दत्ता की पीठ ने इस मामले में डीयू, उसके मुख्य चुनाव अधिकारी, किरोड़ीमल कॉलेज और अन्य प्रतिवादियों से जवाब देने को कहा है.
किरोड़ीमल कॉलेज के बीए संस्कृत (ऑनर्स) के छात्र ने याचिका दायर कर कहा कि कॉलेज प्रशासन द्वारा 25 नवंबर को दो केंद्रीय पार्षदों के चुनाव को अमान्य घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद से यह दोनों पद रिक्त हैं. याचिका में कहा गया है कि कॉलेज और विश्वविद्यालय प्रशासन लिंगदोह समिति के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं, जिनके अनुसार, रिक्त सीटों पर दोबारा चुनाव कराना अनिवार्य है.
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि 25 नवंबर से अब तक 48 दिन बीत चुके हैं, लेकिन नए चुनाव आयोजित नहीं किए गए हैं, जो कि नियमों का उल्लंघन है. लिंगदोह समिति की सिफारिशों के मुताबिक, यदि चुनाव के दो महीने के भीतर किसी भी प्रमुख पदाधिकारी का पद रिक्त हो जाता है, तो उस पर तुरंत चुनाव कराए जाने चाहिए. अगर ऐसा नहीं किया जाता है तो उपाध्यक्ष को अध्यक्ष पद पर और संयुक्त सचिव को सचिव पद पर पदोन्नत किया जा सकता है.
किरोड़ीमल कॉलेज छात्र संघ में केंद्रीय पार्षद का पद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की केंद्रीय परिषद का हिस्सा है. याचिकाकर्ता ने कहा कि कॉलेज प्रशासन इस पद के चुनाव कराने में विफल रहा है, जो कि डूसू और अन्य कॉलेजों में अपनाई जाने वाली प्रथाओं के खिलाफ है.
याचिकाकर्ता ने कहा कि अधिकारियों के अवैधानिक कृत्य के कारण उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा और अंततः उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उन्होंने कोर्ट से अनुरोध किया कि दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश जारी किए जाएं ताकि वे अपने दायित्वों का पालन करें और चुनाव प्रक्रिया में किसी भी और देरी से बचा जाए.
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